जागरण संवाददाता, पानीपत : यमुना से दिल्ली में जा रहे पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने पर बवाल छिड़ा हुआ है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि हरियाणा की लापरवाही के चलते अमोनिया स्तर बढ़ा है। बुधवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर गठित दिल्ली जल बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने यमुना में ड्रेन का पानी छोड़ने के संझौली और खोजकीपुर में पहुंचकर पानी की सैंपल लिए।

टीम ने यमुना में छोड़ने से पहले और पानी छोड़े जाने के बाद पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे है। यमुना के निरीक्षण में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के सदस्य भी शामिल रहे। दिल्ली जल बोर्ड का आरोप है कि वजीराबाद वाटर व‌र्क्स में अमोनिया स्तर बढ़ गया। अमोनिया अधिक होने से कैंसर जैसे रोग फैलने के खतरा रहता है।

मौके पर अमोनिया का स्तर 6.0 मिला

यमुना के निरीक्षण करने पहुंची टीम की मौके पर गई जांच में ड्रेन दो से पानी यमुना में छोड़ने से पहले अमोनिया का स्तर 6.0 मिला, जबकि पानी छोड़ने के बाद यमुना के पानी में अमोनिया का स्तर 0.5 पाया गया। पानीपत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विपिन ने बताया कि जांच में पाया गया है कि यहां से अमोनिया की मात्रा अधिक नहीं है। लैब में जो सैंपल भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट भी जल्द आ जाएगी।

दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि हरियाणा यमुना में आ रहे प्रदूषण को रोक नहीं पा रहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा और सिचाई विभाग को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि तत्परता से यमुना में प्रदूषित पानी डालने पर रोक लगाई जाए। मामले की अगली सुनवाई आगामी मंगलवार को होगी।