महावीर गोयल, पानीपत :

कोविड के दो साल तक स्कूली ड्रेस का कारोबार करने वाले व्यवसायियों को मंदी की मार झेलनी पड़ी। इस वर्ष स्कूली ड्रेस की बंपर डिमांड निकली है। अच्छी मांग निकलने से ड्रेस कारोबारी उत्साहित हैं, लेकिन बेतहाशा भाव वृद्धि होने से परेशानी बनी हुई है। 40 प्रतिशत तक स्कूली ड्रेस में लगने वाले कपड़े के दाम बढ़े हैं। जिस कारण कारोबारियों की पूंजी लागत बढ़ गई है।

100 रुपये मीटर में जो कपड़ा मिलता था वर्तमान में उसका भाव 165 से 170 रुपये मीटर तक पहुंच चुका है। टीशर्ट बनाने का जो कपड़ा 330 रुपये किलो मिलता था उसका भाव 450 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। छह माह में यह तेजी दर्ज की गई है।

पानीपत में हर वर्ष 40-50 करोड़ का स्कूली ड्रेस का कारोबार होता है। इससे सरकार को पांच प्रतिशत जीएसटी से राजस्व मिलता है। स्कूल खुलने के साथ ही अप्रैल से ही ड्रेस की मांग चल रही है। वर्तमान में स्कूली ड्रेस का कारोबार करने वाले दुकानदार सर्दी की ड्रेस तैयार करने में जुटे हैं। सर्दियों में स्वेटर, जर्सी, ब्लेजर, फुल साइज शर्ट, पैंट, जैकेट की मांग निकलती है।

पानीपत में इन शहरों से आता है कपड़ा

पानीपत में हौजरी का कपड़ा लुधियाना से आता है। सूटिग का कपड़ा भीलवाड़ा, वाहिट शर्ट का कपड़ा अहमदाबाद और चैक शर्ट का कपड़ा भिवंडी, मुंबई से आता है।

वर्तमान में लुधियाना के हौजरी के कपड़े में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। भीलवाड़ा से आने वाले सूटिग का कपड़ा 100 रुपये मीटर से बढ़कर 165-170 हो चुका है। हौजरी के कपड़े का भाव 330 से बढ़कर 450 रुपये किलो ग्राम तक पहुंच चुका है।

स्कूल यूनिफोर्म टी-शर्ट, बलेजर जैकेट बनाने वाले आनन्द एंटरप्राजीज इंद्रा बाजार के दुकानदार राजू चावला, नमन चावला ने बताया कि कारोबार तो चला है, लेकिन महंगाई अधिक है। भाव बढ़ने से लागत भी बढ़ती जा रही है। कपड़े के दाम अधिक तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि स्कूली ड्रेस अन्य जिलों मे पानीपत से आपूर्ति दी जाती है। यार्न के दाम बढ़ने से कपड़े के दाम बढ़े हैं।

Edited By: Jagran