यमुनानगर, जागरण संवाददाता। रेड के बाद प्लाईवुड व्यापारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। जिन फैक्ट्रियों में रेड हुई है। अब उनको नोटिस भेजकर रिकार्ड मांगा जा रहा है। जिसमें तीन साल का यूरिया की खरीद, ट्रांसपोर्टेशन आदि का रिकार्ड भरकर देना होगा। इसका एक प्रफार्मा दिया गया है। इसमें खरीद की बैंक ट्रांजेक्शन सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भरकर देनी होगी। नोटिस का जवाब देने के लिए समय दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी फैक्ट्री संचालक ने यह जवाब नहीं दिया है।

दरअसल, यूरिया का प्रयोग प्लाईवुड फैक्ट्रियों में ग्लू बनाने के लिए होता है। नियमानुसार व्यापारियों काे टेक्निकल यूरिया का प्रयोग करना होता है। यह 4600 रुपये प्रति बैग पड़ता है। जबकि कृषि योग्य यूरिया महज 300 से 400 रुपये का पड़ता है, लेकिन इसके फैक्ट्री में प्रयोग पर रोक है। इसका ही अवैध धंधा होता है। खाद विक्रेताओं की मिलीभगत से किसानों को मिलने वाला यूरिया फैक्ट्रियों में सप्लाई होता है।

हाल ही में 25 अप्रैल को भी जीएसटी की टीम ने जिले में रेड की थी। जिसमें ग्लू बनाने वाली फैक्ट्री पर छापेमारी के बाद खाद विक्रेता करेहडा खुर्द में हर्षित ट्रेडर्स व एमएस खाद भंडार के गोदाम पर छापेमारी की गई थी। जिससे पुख्ता हुआ कि ग्लू बनाने के लिए कृषि योग्य यूरिया का प्रयोग फैक्ट्रियों में किया जा रहा है। बिलों में 90 लाख रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई थी। इसके बाद ही मिनिस्ट्री आफ फर्टिलाइजर की टीम ने यहां पर छापेमारी की।

छह फैक्ट्रियों पर हुई थी छापेमारी

20 मई को जिले में कृषि मंत्रालय व कृषि विभाग की टीमों ने छह फैक्ट्रियों पर छापेमारी की थी। इनमें जोडिया स्थित ईएमएम डीइइ प्लाईवुड इंडस्ट्रीज, श्री बालाजी इंडस्ट्री, नीलगिरी वुडक्राफ्ट, बाड़ी माजरा स्थित राधा कृष्ण प्लाईबोर्ड, साबापुर स्थित यूनाइटेड प्लाईवुड व औद्योगिक एरिया स्थित गलोब पैनल इंडस्ट्रीज पर छापेमारी हुई थी। जांच में सहयोग न करने पर ईएमएम डीइइ प्लाईवुड इंडस्ट्रीज, श्री बालाजी इंडस्ट्री व यूनाइटेड प्लाईवुड के संचालकों पर एफआइआर कराई गई। जबकि अन्य तीनों फैक्ट्रियों के स्टाक की बिक्री व प्रयोग बंद कर नोटिस दिया गया है।

तीन साल का देना होगा बिक्री का रिकार्ड

प्लाईवुड फैक्ट्री संचालकों को तीन साल का यूरिया की खरीद का रिकार्ड देना होगा। ट्रांसपोर्टेशन, यानि किस माध्यम से यूरिया मंगवाया। खरीद की बैंक ट्रांजेक्शन सहित अन्य जानकारियां देनी होगी। हालांकि तीन साल का रिकार्ड मांगने को लेकर ही व्यापारियों का विरोध है। जिस वजह से ही अभी तक नोटिस का जवाब नहीं दिया गया है। क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डा. बाल मुकंद कौशिक का कहना है कि नोटिस का जवाब देने के लिए फैक्ट्री मालिकों को समय दिया गया है। यदि सोमवार तक जवाब नहीं दिया, तो इस बारे में कृषि मंत्रालय को लिख दिया जाएगा।

Edited By: Anurag Shukla