यमुनानगर, जागरण संवाददाता। आढ़तियों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए आढ़तियों ने पुराना नेशनल हाइवे पर जाम लगा दिया। आरोप है कि आढ़तियों की जायज मांगों को लेकर प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता व अन्य आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। सरकार पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। उनसे बातचीत करना भी मुनासिब नहीं समझा जा रहा है।

आढ़ती जगाधरी अनाज मंडी में एकत्रित हुए और भूख हड़ताल पर बैठ गए। उसके बाद नारेबाजी करते पुराना नेशनल हाइवे पर पहुंचे और जाम लगा दिया। आढ़ती इस बात पर अड़े हुए थे कि जब तक प्रदेशाध्यक्ष की ओर से मैसेज नहीं आता, तब तक सड़क से नहीं हटेंगे। बाद में थाना प्रभारी किसानों के बीच पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा।

आढ़ती व किसान दोनों परेशान

हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान शिव कुमार संधाला व जगाधरी प्रधान मनीष चौधरी का कहना है कि आढ़ती अपनी मांगों को लेकर डीसी से लेकर मंत्री तक सभी को ज्ञापन दे चुके हैं। करनाल में सीएम मनोहर लाल के आवास को घेराव कर चुके हैं। अब प्रदेशाध्यक्ष सहित अन्य आढ़ती भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। बावजूद इसके सरकार इस दिशा में बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। सरकार की इस अनदेखी से किसान व आढ़ती दोनों परेशान हैं। क्योंकि खेतों में धान की फसल तैयार खड़ी है। लेकिन सरकार अड़ियल रवैया अपनाए हुए है। आढ़तियों से बातचीत के लिए सरकार को आगे आना चाहिए और उनकी मांगों को पूरा किया जाना चाहिए।

ये हैं मुख्य मांगें

- किसानों की सभी फसलें सरकार द्वारा एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से खरीदी जाए। आढ़ती पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए।

- सरकार द्वारा खरीदी गई सभी फसलों का भुगतान किसान की इच्छानुसार किया जाए।

- अनाज मंडियों में ई नेम लागू नहीं हो सकती। क्योंकि ई-ट्रेडिंग फिनिश्ड गुड्स की हो सकती है। जबकि हमारी मंडियों में आने वाली फसलें एक तरह का कच्चा माल है। इस प्रक्रिया को लागू न किया जाए।

- सीमांत किसान वर्षों से हमारी अनाज मंडियों से जड़े हुए हैं, इसलिए उनकी धान खरीदने में आनाकानी न हो।

- धान पर मार्केट व एचआरडीएफ फीस चार प्रतिशत की बजाय एक प्रतिशत की जाए।

- किसान की पूरी फसल एमएसपी पर खरीदी जाए।

- गेहूं के सीजन 2020 की जो पेमेंट ब्याज के रूप में आढ़तियों से काटी गई थी, वह जल्द वापस की जाए।

- एफसीआई से पूरी आढ़त व मजदूरी दिलाई जाए और इसका शपथ पत्र न लिया जाए।

- आढ़ती की फर्म का एक लाइसेंस पूरे हरियाणा की मंडियों में मान्य होना चाहिए।

- मार्केट फीस के लाइसेंस की अवधि जीएसटी की भांति असीमित होनी चाहिए। बार-बार रिन्यू न हो।

- किन्हीं कारणों के चलते यदि आढ़ती मंडी में दुकान निर्माण करने में असमर्थ रहा है तो उस पर भारी भरकम जुर्माना न लगाया जाए।

- मंडियों में आढ़त के अलावा अन्य व्यापार करने की अनुमति दी जाए।

Edited By: Anurag Shukla