पानीपत, जेएनएन। छत्तीसगढ़ में 48 घंटे तक दलदल में फंसे हाथी की मौत तो याद होगी। एक वन्य जीव के तड़प तड़प कर मर जाने से प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा था। अगर ऐसा हादसा एक युवक के साथ हुआ होता तो फिर क्या होता? कुछ नहीं। जी हां, ये सच है। क्योंकि पानीपत में पेट की आग बुझाने के चक्कर में कूड़़ा  इकट्ठा करने वाले एक युवक की दलदल में फंसकर जान चली गई। 

सेक्टर-29 पार्ट-2 रिसालू बाईपास पर राज ओवरसीज के पास दलदल में फंसकर विद्यानंद कॉलोनी के सद्दाम की जान चली गई। सेक्टर-29 थाना प्रभारी विक्रांत ने बताया कि राहगीर ने रिसालू बाईपास पर नाले के पास पड़ी राखी व कीचड़ में व्यक्ति का शव देखा। मौके पर डीएसपी बिजेंद्र सिंह, एफएसएल टीम और ड्यूटी मजिस्ट्रेट पहुंचे। जेसीबी से शव को दलदल से निकाला। मृतक की शिनाख्त सद्दाम नाम के युवक के रूप में हुई। आसपास के लोगों ने बताया कि सद्दाम कूड़ा इकट्ठा करता था।    

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इसी दलदल में फंसकर युवक की मौत हुई।

हुडा की लापरवाही आई सामने

चार महीने से नाले की गाद और मिट्टी से दलदल बनी हुई है, लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने सफाई की व्यवस्था नहीं की। इसी लापरवाही से सद्दाम की मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर जेसीबी से मिट्टी इधर-उधर डलवा दी। सफाई की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। करीब आधा किलोमीटर तक दलदल बनी हुई है। भविष्य में और भी लोग इसमें फंसकर जान गवां सकते हैं। फैक्ट्रियों में काम करने वाले खौफजदा है कि वे हादसे का शिकार न हो जाएं। 

दो विभागों के जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे का बता रहे हैं एरिया

दैनिक जागरण ने हसविप्रा के इस्टेट ऑफिसर योगेश रंगा से पूछा कि नाले के पास पड़ी गाद व मिट्टी की सफाई क्यों नहीं कराई गई। रंगा ने जवाब दिया कि एक साल पहले सेक्टर 29 पार्ट 1 और 2 एचएसआइआइडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन)  को सौंप रखा है। जिम्मेदारी इसी विभाग की है। इस बारे में एचएसआइआइडीसी मैनेजर मंजीत ने बताया कि सीवर, रोड व नालों की सफाई की जिम्मेदारी हसविप्रा की है।  

एडवोकेट ने की शिकायत

एडवोकेट वैभव समीर एप पर शिकायत दी है कि दलदल में फंसने से एक व्यक्ति की जान चली गई है। हसविप्रा और प्रदूषण विभाग ने लापरवाही बरती है। इसी वजह से व्यक्ति ने जान गवां दी। मौके पर प्रदूषण विभाग के अधिकारियों को भेजकर मुआयना कराया जाए। ताकि दलदल की वजह से और लोगों की जान न जाए। 

रात को नाले के पास से गुजरने में लगता है डर

ठेकेदार उमेश ने कहा कि सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। अंधेरा रहता है। नाले के पास दलदल है। रात को पास से गुजरने में डर लगता है कि कहीं बाइक फिसल कर दलदल में न चली जाए। हादसा होने का अंदेशा रहता है। 

नाले के पास की सफाई कराई जाए

श्रमिक त्रिलोक सिंह ने बताया कि कई महीने से नाले के पास कई महीने से दलदल बनी हुई है। इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है। नाले के पास की सफाई कराई जाए। 

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