पानीपत, जेएनएन। एक युवक की पुलिस हिरासत में मौत हो जाने से खफा उसके परिवार वालों ने शनिवार को पांच घंटे जमकर बवाल काटा। शहर के विकास नगर में रहने वाले 30 वर्षीय राजेश कुमार को पलिस की सीआइए (क्राइम इन्वेस्टीगेशन एजेंसी)-2 शाखा ने 9 दिसंबर को हिरासत में लिया था।

राजेश मूल रूप से जींद के डालम आला गांव का गांव का निवासी था। उसपर हत्या और अपहरण के अभियुक्त को शरण देने का आरोप था। उसे 11 दिसंबर को तबीयत बिगडऩे पर स्थानीय अस्पताल में इलाज कराने के बाद पीजीआइ रोहतक ले जाया गया था. जहां शुक्रवार को उसकी मौत हो गई थी।

धरने पर बैठे लोग

राजेश की मौत के बाद शनिवार सुबह उसके घर के पास सैकड़ों महिलाएं और पुरुष धरने पर बैठ गए। राजेश के परिवार वालों का आरोप था कि राजेश को बीड़ी व सिगरेट से भी दागा गया और यातनाएं दी गईं। वे सीआइए-2 के पूरे स्टाफ खिलाफ अपहरण व हत्या का केस दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।

डीएसपी मुख्यालय पहुंचे

धरने की जानकारी मिलते ही डीएसपी मुख्यालय सतीश कुमार वत्स, जिला परिषद की सीईओ सुमन भांखड़ और बापौली थाना प्रभारी राजकुमार मौके पर पहुंचे। लेकिन परिजन अड़ गए कि जब तक एसपी नहीं आएंगे तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इसके बाद एसपी सुमित कुमार पहुंचे तो राजेश के पिता रतन सिंह ने हाथ जोड़कर शिकायत सौंपी। उसमें लिखा था कि पुलिस की पिटाई की वजह से राजेश की मौत हुई। एसपी ने आश्वासन दिया कि मजिस्ट्रेट के सामने परिजनों के बयान दर्ज हो जाने के बाद  एफआइआर दर्ज होगी और मजिस्ट्रेट के सामने वीडियोग्राफी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद परिजन माने।

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राजेश की फाइल फोटो।

राजेश के साले का नाम था हत्या और अपहरण के केस मे

महराणा गांव के संतोष कुमार का विकास नगर से अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। इसमें राजेश के साले बिंझौल (पानीपत) निवासी सोनू और रोहतक के ब्राह्म्णवास निवासी सतेंद्र सहित पांच लोगों का नाम आया था। सतेंद्र को शरण देने के आरोप में पुलिस राजेश को घर से ले गई थी।

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राजेश की मौत की खबर सुनते ही बिलखती उसकी पत्‍नी और उसे चुप कराता बेटा।

सोते हुए पति को उठा ले गए, जेठानी के साथ मारपीट की

राजेश की पत्नी पूजा ने बताया कि उनका परिवार जींद के डालमआला गांव का निवासी है। पूरा परिवार बीस साल से यहां विकास नगर में रहता है। उसके जेठ विनोद की पांच महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। परिवार में माता-पिता, पत्नी, बड़ा भाई मदन, नन्हा, शिवकुमार, एक बड़ी व एक छोटी बहन है। उसका पति खादी आश्रम के पास रिवेरा फैक्ट्री में दो महीने से सिलाई का काम करता था। 9 दिसंबर को 5:30 बजे फैक्ट्री से घर लौटा। रात 10:30 बजे सादे कपड़े पहने चार-पांच लोग जबरन घर में घुसे और सो रहे पति को उठाकर घसीटने लगे। उसने शोर मचाया तो जेठानी सत्तो, शकुंतला और बुजुर्ग ससुर रतन सिंह छुड़वाने लगे। पुलिसकर्मी ने बंदूक दिखाकर जेठानी शकुंतला से मारपीट की और धक्का दे दिया। वे उसके पति को जबरन गाड़ी में डाल ले गए।

बेटे पूछ रहे हैं पापा कब आएंगे, पति का मुंह तक नहीं देख पाई

विलाप करते हुए पूजा ने एसपी से कहा कि साहब उसका बेटा नवीन (11) और मीतू (5) का बार-बार पूछते हैं कि पापा कहां है। इन्हें क्या जवाब दूं। उसका पति फैक्ट्री में काम कर घर चला रहा था। बदमाश नहीं था।

चाचा मरने वाले थे तब उन्हें पुलिस ने जबरन एंबुलेंस में डाला

राजेश के भतीजे राकी ने बताया कि 11 दिसंबर को उसके चाचा राजेश कुमार का प्रेम अस्पताल में ऑपरेशन की तैयारी चल रही थी। डॉक्टरों ने पीजीआइ रोहतक ले जाने की सलाह दी। सीआइए-2 पुलिस ने जबरन उसे, उसके पिता मदन और दादा रतन को  जबरन एंबुलेंस में डालकर घायल चाचा को पीजीआइ ले जाने का दबाव डाला। उन्हें धमकाया गया।

Posted By: Ravi Dhawan

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