जागरण संवाददाता, पानीपत : राजनगर के सागर जागलान ने 80 किलोभार वर्ग में हंगरी में हुई विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। अब उनका आगामी कामनवेल्थ गेम्स और 2024 में होने वाले ओलिपिक में पदक जीतना है। इसकी तैयारी में वह जुट गए हैं। सागर सोनीपत स्थित अश्वनी कुश्ती एकेडमी में अभ्यास करते हैं। रविवार को सागर पैतृक गांव नौल्था पहुंचे और बाबा लाठे वाला का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्हें खुली जीप से संजय कालोनी स्थित परशुराम धर्मशाला में लाया गया। यहां पर पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा, सांसद संजय भाटिया के बेटे चांद भाटिया व अन्य गणमान्य लोगों ने सागर व उनके कोच अश्वनी दहिया का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। घर पर दादी कमला, मां सरिता व अन्य महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इस मौके पर सागर के पिता मुकेश जागलान, दादा रणधीर जागलान, भाई दीपक, पार्षद प्रमोद देवी, पूर्व पार्षद महेंद्र जागलान, रधणीर सिंह, नरेश जागलान और सुरेश कुमार मौजूद रहे।

बजरंग की तरह विरोधी पहलवान को थकाकर हराते हैं

सागर जागलान ने दैनिक जागरण को बताया कि वह देश के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया के मुरीद हैं। उन्हीं की तरह वह भी मुकाबले में विरोधी पहलवान को थका कर हराते हैं। विश्व कैडेट चैंपियनशिप में भी वह चार मुकाबलों में पिछड़ रहे थे। अंतिम राउंड में सचेत होकर दांव लगाए और विरोधी पहलवानों को हरा दिया। फाइनल मुकाबले में यूएस के पहलवान को 4-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

राई स्पो‌र्ट्स स्कूल में दाखिला न होने से हो गए थे मायूस

सागर के पिता मुकेश जागलान एक एक्सपोर्ट हाउस में मैनेजर हैं। मुकेश बताते है कि उन्हें भी कुश्ती का शौक था, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से आगे नहीं बढ़ पाया। बेटा सागर खेलों में आगे बढ़े, इसलिए स्पो‌र्ट्स स्कूल राई में दाखिला दिलाने का प्रयास किया। रिहायशी प्रमाण पत्र न बन पाने कारण बेटे का दाखिला नहीं हुआ। बेटा मायूस हो गया था। इसके बाद बेटे ने सोनीपत के प्रताप स्कूल में कुश्ती का अभ्यास किया और फिर कोच अश्वनी दहिया से कुश्ती के टिप्स सीखे। बेटी की कामयाबी से वह खुश है। वहीं मां सरिता का कहना है कि स्वर्ण पदक जीतकर बेटे ने उनके पति का सपना पूरा कर दिया है।

एशियन चैंपियन और भारत कुमार का खिताब जीत चुके हैं

सागर जागलान 16 साल की आयु में ही भारत कुमार का खिताब जीत चुके हैं। सब जूनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता है। वे पानीपत के सबसे कम आयु में जिला कुमार का खिताब भी जीत चुके हैं।

Edited By: Jagran