जागरण संवाददाता, पानीपत : जनस्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग के ट्यूबवैलों का पानी पेट और स्किन संबंधी रोग परोस रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। हेल्थ की टीमों ने चार माह(मार्च से जून) में पानी के 9710 सैंपल लिए हैं। इनमें से 3485 स्थानों का पेयजल दूषित मिला। पानी में पर्याप्त क्लोरीन नहीं थी। गांव सिवाह स्थित जिला जेल के छह सैंपल भी फेल मिले।हालांकि, अब जेल में आरओ (रिवर्स ओस्मोसिस) वाटर प्यूरिफायर लगवा दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग से मिली रिपोर्ट के मुताबिक चार माह में पानी के 9710 नमूनों का ओटी (आर्थोटोलिडाइन टेस्ट) किया गया है। इनमें से 6225 सैंपल की रिपोर्ट सही मिली है। 3485 (35.89 फीसद) घरों, सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भवनों का पानी पीने योग्य नहीं था। ये सैंपल जिला के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए थे। 116 सैंपल बैक्ट्रोलाजिकल टेस्ट के लिए भेजे थे, 15 फेल मिले। यानि, पानी में मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तमाम बैक्टीरिया मौजूद मिले हैं। नगर निगम क्षेत्र में पेयजल की स्थिति खराब है। स्वास्थ्य विभाग ने शहरी क्षेत्र में चार माह के अंतराल में 1299 सैंपल लिए।इनमें से मात्र 266 स्थानों का पानी पीने योग्य रहा। 1033 सैंपल (79.52 फीसद)क्लोरीन की कमी या अधिकता के कारण फेल हो गए।

नोडल अधिकारी डा. कर्मवीर चोपड़ा ने बताया कि जांच रिपोर्ट जनस्वास्थ्य विभाग को भेजते हुए, शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए कहा है, ताकि पेयजल सेवन से कोई व्यक्ति बीमार न हो। इस मौसम में दूषित खानपान से पेट संबंधी बीमारियों और टायफाइड का खतरा अधिक रहता है। पानी को उबालकर ठंडा कर लें, इसके बाद सेवन करें। अशुद्ध पेयजल से होने वाली बीमारियां

-उल्टी-दस्त, आंतों में संक्रमण।

-पीलिया, गले में इंफेक्शन।

-टायफाइड बुखार, स्किन एलर्जी।

-लगातार सेवन से किडनी में संक्रमण।

-नर्वस सिस्टम को नुकसान। पानी में क्लोरीन ज्यादा होने के दुष्प्रभाव

-पेयजल में क्लोरीन की अधिकता धीमे जहर की तरह है।

-उल्टी दस्त की गिरफ्त में आ सकते हैं।

-फेफड़ों को नुकसान, श्वास रोग का खतरा।

-भोजन नली, मलाशय, फेफड़ों, गले में कैंसर की संभावना।

-दिल की बीमारिया, धमनियों का सख्त होना, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और एलर्जी।

-त्वचा और बालों पर दुष्प्रभाव। नहीं कराते कैमिकल टेस्ट

स्वास्थ्य विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग पेयजल का केमिकल टेस्ट नहीं कराते। कराएं तो पता चले कि पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रेटस, आयरन जैसी धातुएं किस मात्रा में मिश्रित हैं। जेल का पानी भी फेल

स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ सुपरवाइजर सतीश ने बताया कि एक जुलाई को जिला जेल की छह ट्यूबवैलों से पानी का सैंपल लिया गया था। किसी भी ट्यूबवैल पर डोजर मशीन नहीं थी, नतीजा पेयजल को क्लोरीन से शुद्ध नहीं किया जा रहा था। छह माह पहले लिए सैंपल की स्थिति भी ऐसी ही थी। उधर, जेल अधीक्षक देवीदयाल ने बताया कि 1000 लीटर पानी प्रतिघंटा शुद्ध करने वाला आरओ प्लांट 10 दिन पहले लग चुका है। छोटे आरओ भी लगवाए हैं।

Edited By: Jagran