पानीपत में 8 करोड़ का GST घोटाला, महिला उद्यमी की आईडी हैक; 700 से अधिक फर्जी बिल जारी
पानीपत में एक महिला उद्यमी की जीएसटी आईडी हैक कर 8 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी टर्नओवर दिखाने और ...और पढ़ें
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पानीपत में 8 करोड़ का GST घोटाला। फाइल फोटो
HighLights
महिला उद्यमी की जीएसटी आईडी हैक कर फर्जीवाड़ा।
आठ करोड़ से अधिक का फर्जी टर्नओवर दिखाया गया।
700 से ज्यादा जाली बिल जारी कर घोटाला।
जागरण संवाददाता, पानीपत। जीएसटी सिस्टम से जुड़ा एक घोटाला सामने आया है। महिला उद्यमी की जीएसटी आइडी को हैक कर करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी टर्नओवर दिखाने और 700 से ज्यादा जाली बिल जारी करने का मामला उजागर हुआ है। माडल टाउन थाना पुलिस ने इस मामले में संगठित साइबर और आर्थिक अपराध की धाराओं में एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़िता सुशीला देवी निवासी शुगर मिल कालोनी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में राज एंड संस नाम से प्लास्टिक रिसाइक्लिंग का व्यवसाय शुरू किया था, जिसे कोरोना काल के बाद वर्ष 2023 में बंद कर दिया गया। आरोप है कि मार्च 2025 में आइटीआर और जीएसटी देखरेख के नाम पर एक सीए से जुड़े व्यक्ति हिमांशु शर्मा को दस्तावेज सौंपे गए। इसके बाद उनकी जीएसटी आइडी का दुरुपयोग किया गया।
मई से अक्टूबर 2025 के बीच 27 कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सीमेंट और सेनेटरी से जुड़े करीब 700 फर्जी बी टू बी बिल जारी किए गए, जबकि पीड़िता का इस तरह के कारोबार से कोई लेना-देना नहीं था। 26-27 नवंबर को जब जीएसटी पोर्टल दोबारा खुला तो नील रिटर्न की जगह लाखों रुपये की एंट्री और आठ करोड़ से अधिक का टर्नओवर दर्ज मिला। सीजीएसटी कार्यालय की जांच में पुष्टि हुई कि पीड़िता का मोबाइल नंबर और ईमेल जीएसटी रिकार्ड से हटा दिया गया था, जिससे सभी ओटीपी अलर्ट और लागिन एक्सेस आरोपितों के पास जाते रहे।
फर्म के नाम पर 27 फर्म व नगर निगम, जिला परिषद, सिंचाई विभाग, जल संसाधन, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना व विभागों के नाम पर बिल काटे गए हैं। सबसे अहम सबूत 30 नवंबर 2025 की एक आडियो रिकार्डिंग है, जिसमें हिमांशु और उसके साथी हर्ष व अर्पित फर्जी बिलिंग, आइडी पासवर्ड बदलने और जीएसटी एक्सेस होने की बात स्वीकार करते सुनाई दे रहे हैं।
बाद में पीड़िता के बेटे को धमकियां भी दी गईं। पुलिस ने बीएनएस, आइटी एक्ट और जीएसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच एसडीयू पानीपत को सौंप दी है। अब जीएसटी पोर्टल की टेक्निकल आडिट, आइपी लाग, ओटीपी रिकार्ड, 27 कंपनियों की भूमिका और सरकारी विभागों में संभावित मिलीभगत की जांच की जा रही है। पुलिस इसे संगठित जीएसटी फ्राड और बड़े साइबर अपराध के तौर पर देख रही है।
