मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, पानीपत : नागरिक अस्पताल 200 से 300 बेड का हो चुका है। तकरीबन 42 करोड़ रुपये की लागत का यह प्रोजेक्ट तैयार है, लेकिन डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी में शो पीस बना हुआ है। उधर, करीब 40 दिनों से सिविल सर्जन की कुर्सी खाली होने से कार्यवाहक सिविल सर्जन इमरजेंसी वार्ड को भी नई बि¨ल्डग में शिफ्ट करने का निर्णय नहीं ले सके हैं।

उल्लेखनीय है कि 200 बिस्तरों वाले एडिशनल ब्लॉक का निर्माण फरवरी 2015 में शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने इमारत का निर्माण कार्य केबीजी इंजीनियर्स एजेंसी से कराया है। अपग्रेडेशन योजना के तहत बिस्तरों की संख्या स्वत: बढ़ गई है। बिजली चालित उपकरणों का ट्रायल चल रहा है।

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नई बिल्डिंग के अनुरूप यह चाहिए

अस्पताल में मेन पॉवर की बात करें तो सौ बेड के हिसाब से भी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के मानकों की बात करें तो 300 बेड के अस्पताल में 7 एसएमओ, लगभग 50 मेडिकल ऑफिसर, 70-80 डॉक्टर, 300 स्टाफ नर्स और 500 से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चाहिए। वर्तमान में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 13 नौकरी छोड़ चुके हैं।

अस्पताल की सफाई व्यवस्था मात्र 21 कर्मचारियों के भरोसे है, इनमें 17 आउट सोर्सिंग के हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों के अभाव के चलते विभाग के उच्चाधिकारी भी नई इमारत के उद्घाटन में रूचि नहीं दिखा रहे हैं।

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मरीजों को नहीं मिल रहीं ये सुविधाएं :

-प्राइवेट कमरों में कम दर पर वीआइपी ट्रीटमेंट।

-पीपीपी मोड पर एमआरआइ।

-एलाइजा टेस्ट और हीमो डायलिसिस।

-ब्लड बैंक।

-अत्याधुनिक मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट।

-ट्रामा सेंटर, हाइटेक इमरजेंसी।

-पर्याप्त एंबुलेंस।

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एक डॉक्टर के भरोसे बापौली सीएचसी :

फोटो संख्या 59ए

बापौली में 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हैं। यूं तो यहां पांच डॉक्टरों की नियुक्ति है, लेकिन चार दूसरे केंद्रों में डेपुटेशन पर गए हुए हैं। एकमात्र डॉक्टर सोमवीर ने बताया कि रोजाना 250-300 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। डिलीवरी हट में हर माह 80-90 डिलीवरी होती हैं, बिजली कट होने पर जनरेटर की सुविधा नहीं होने पर प्रसव दर्द से पीड़ित गर्भवती को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ग्राम सरपंच ¨डपल रावल ने कहा कि बेहतर सुविधाओं की मांग की जा चुकी है लेकिन सुनवाई नहीं होती।

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ददलाना में न एसएमओ न एमओ :

फोटो 59बी

ददलाना स्थित सीएचसी के हालात अत्याधिक बदतर हैं। वर्ष 2012 में बनी डिलीवरी हट महिला डॉक्टर के अभाव में चालू नहीं की जा सकी है। रिफाइनरी ने सीएचसी को आंखों की स्क्री¨नग के लिए मशीन उपलब्ध कराई थी। सप्ताह में एक दिन मंगलवार को नेत्र रोग विशेषज्ञ आते हैं बाकी दिन मशीन धूल फांकती है। एसएमओ और एमओ भी केंद्र में नहीं बैठते। अन्य पद भी रिक्त पड़े हुए हैं। गांव के सरपंच दीपक राणा ने बताया कि सीएचसी की दुर्दशा के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं। डिलीवरी हट चालू नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को सिविल अस्पताल जाना पड़ता है।

Posted By: Jagran

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