पानीपत, [महावीर गोयल]। 3 डी चादरें पानीपत के कपड़ा और पॉवरलूूम उद्योग को नई पहचान व नया मुकाम दे रही हैं। पानीपत की 3D चादरें बेहद खास हैं और लोगों को खूब भा रही हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत दाम में कम और काम में दम यानि बेहद कम कीमत में अच्‍छी क्‍वालिटी है। यही कारण है कि अब यह घरेलू मार्केट से इसने चीन को आउट कर दिया है। विशेष बात यह है कि पानीपत केे उद्यमी चीन को उसकेे हथयार से ही मात दे रहे हैं। चीन के वाटरजेट मशीन से उससे अच्‍छी क्‍वालिटी व सस्‍ते चादर और कपड़े यहां तैयार दिए जा रहे हैं।

दरअसल, वाटरजेट मशीनें लगने के बाद यह क्रांति संभव हो पाई। घरेलू मार्केट में तीन साल पहले चीन का कब्जा था। अब 90 प्रतिशत मार्केट में पानीपत का बना कपड़ा जा रहा है। इस कपड़े से 3डी चादर बनाई जा रही है। यहां के उद्योगों को सरकार यदि थोड़ी से मदद करे तो 100 प्रतिशत घरेलू बाजार में तो अपना बना माल बिकेगा ही साथ निर्यात भी हो सकेगा।

चीन से भी सस्ता कपड़ा बना कर दे रहे मात, 90 प्रतिशत चीन की मार्केट पर कब्जा

मिंक, पोलर कंबल बनाने के बाद 3 डी चादर बनाने में टेक्सटाइल उद्यमियों ने चीन को मात दी। सस्ता कपड़ा चीन से आने वाली वाटर जेट पर ही बनाया जाता है। मशीन चीन होने बाद सस्ता कपड़ा बनाना यहां के उद्यमियों की बड़ी उपलब्धी है।

शहर में आज 4000 वाटर जेट मशीनें लग चुकी है। इन मशीनों पर पावर लूम की तरह ताना तैयार किया जाता है। उसके बाद कपड़ा तैयार होता है। वाटर जेट में पोलियस्टर (मेन मेड फाइबर) से कपड़ा बनता है। कपड़ा बनते समय मशीन में पानी गिरता रहता है। इसीलिए इन्हें वाटर जेट का नाम दिया गया है। उसके बाद भांप से कपड़े को सुखाया जाता है। प्रिंटिंग के बाद इस कपड़े से थ्री डी चादर बना दी जाती है।

22 रुपये प्रति मीटर में हो रहा कपड़ा तैयार, 110 रुपये डबल बेड की दो चादर

दरअसल शहर केे उद्योग 22 रुपये प्रति मीटर की कीमत पर अच्‍छा कपड़ा उपलब्‍ध करा रहे हैं। 110 रुपये में डबल बेड की दो चादर थोक में बेची जा रही है। दुकानदारों पैकिंग आदि करके चादर को भले ही 150 रुपये में दो बेचता हो। लेकिन मैन्युफैक्चर्स इसे 110 रुपये तक बेच रहे हैं। इतना सस्ता तो टावल भी नहीं मिल पाता।

पोलियस्टर कॉटन टच दे रहे

पोलियस्टर से बनी चादर को कॉटन का टच दिया जा रहा है। पिचिंग करने के बाद चादर की लुकिंग कॉटन की चादर जैसे लगती है। बाजार में खरीदने वाले भी गच्चा खा जाते हैंं। पोलियस्टर का कपड़ा होने के कारण यह लंबे समय तक चलता है। इसी कपड़े से सस्ता पोलर कंबल जो  50-60 रुपये तक बिकता भी बनाया जा रहा है।

500 आरपीएम स्पीड पर चलती है वाटर जेट

वाटर जेट की स्पीड 500 आरपीएम (रेटिंग पर मिनट) होती है। एक मशीन 24 घंटे में 500 मीटर कपड़ा तैयार कर देती है। जबकि शटललैस 200-250 आरपीएम पर चलती है। छह वाटर जेट चलाने के लिए एक ही कारीगर की जरूरत होती है। अर्थात लेबर कोस्ट बहुत कम आती है। पानीपत में 1980 तक पावर लूम का दौर था। उसके बाद 2015 तक शटल लैस का दौर रहा। पिछले चार साल में वाटर जैट का दौर शुरु हुआ है।

वाटर जेट के कपड़े से 3 डी चादर के साथ रजाई, ड्रेस मेटिरियल तक बन रहे

वाटर जेट का सस्ता कपड़ा होने के कारण रजाई पर लगने वाला कपड़ा, ड्रेस मैटिरियल तक बन रहे हैं। सूरत, अहमदाबाद में पहले वाटर जेट लगे। वहां 3 डी चादर के अलावा ड्रेस मैटिरियल, रजाई कवर तक बनते हैं।

पोलियस्टर हब बनने का फायदा : जगदीश जैन

उद्योगपति जगदीश जैन का कहना है कि पानीपत पोलियस्टर हब बन चुका है। रिलायंस, आलोक, इंडो रामा, बिलासा आदि बड़े घराने पोलियस्टर धागा बनाते हैं। पानीपत पोलियस्टर धागे का हब बन चुका है। यहां मिंक, पोलर, थ्री-डी चादर पोलियस्टर से बनती है। वाटरजेट का दौर भी पोलियस्टर धागे की उपलब्धता से आया है। प्रतिदिन पानीपत में 15 लाख मीटर कपड़ा वाटर जेट से बनाया जा रहा है।

छह लाख रुपये में एक मशीन

उद्यमी सुरेश गुप्ता ने बताया कि वाटर जेट मशीन छह लाख रुपये में पड़ती है। 22 रुपये मीटर में वाटर जेट पर कपड़ा तैयार होता है। प्रिंट करने के बाद 35 रुपये में कपड़ा तैयार हो जाता है। 16-17 रुपये स्कवेयर मीटर से सस्ता कोई कपड़ा नहींं है। वाटर जेट से बना कपड़ा 17 रुपये स्कवेयर मीटर पड़ रहा है।

हरियाणा सरकार बनाए पोलियस्टर धागे के डिपो

हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन विनोद खंडेलवाल का कहना ह, यहां के उद्यमियों ने अपनी मेहनत के बदौलत सस्ता कपड़ा बनाने में क्रांति लाने का काम किया है। यहां पोलिस्टर धागे का डिपो बनाया जाना चाहिए। इससे  सरकार को राजस्व मिलेगा। उद्यमी लागत कम होगी। और नए उद्योग स्थापित होने का रास्ता साफ होगा। यहां इतना सस्ता कपड़ा बन सकता है कि हमें चीन को ही निर्यात करने की स्थिति में होंंगे।

पानी के प्रेशर से चलता है बाना 

वाटर जेट मशीन में बाना पानी के प्रेशर आगे चलता है। शटल लैस में इस कार्य के ले रेपियर लगे होते हैं। पानी से काटन खराब हो जाती है। इसीलिए मशीन पर कॉटन का कपड़ा नहीं बन सकता। पानी से पोलियस्टर खराब नहीं होता है। पानी के प्रेशर से चलने के कारण मशीन का नाम वाटर जेट पड़ा। छह वाटर जेट पर एक ही कारीगर की जरूरत पड़ती है। जबकि एक शटललैस चलाने के एक कारीगर की जरूरत होती है।

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