जागरण संवाददाता, पानीपत : एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार आयोजित सात दिवसीय मेगा एनएसएस कैंप का तीसरा दिन रहा। फ‌र्स्ट एड ट्रेनर एवं होम नर्सिंग रेडक्रास से रोहनी भोकर ने बताया कि आपातकाल में किस तरह चिकित्सा मदद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा दम घुटने, ह्रदय गति रुकने, खून बहने, शरीर में जहर के होने, जल जाने, गर्मी के स्ट्रोक, बेहोश या कोमा की स्थिति में, मोच, हड्डी टूटने और जानवर के काटने पर दी जाती है।

मीना कांबोज ने कहा की सबसे पहले हमें घायल व्यक्ति की सांस की जांच करनी चाहिए। अगर चोट लगी है और रक्त बह रहा हो तो जल्द से जल्द रक्तस्त्राव को रोकना चाहिए। अगर घायल व्यक्ति को सदमा लगा हो तो उसे समझाना और सांत्वना देनी चाहिए। अगर व्यक्ति बेहोश हो तो उसे होश में लाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हड्डी टूट गयी हो तो व्यक्ति को सीधा करके उसका दर्द कम करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। फ‌र्स्ट एड पूर्ण चिकित्सा नहीं होती है कितु इससे अस्पताल ले जाने के लिए मरीज की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। फ‌र्स्ट एड किट घर पर बनाई जा सकती है।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि युवा सभी को अपने साथ लेकर चलें। कोरोना आपदा ने वैसे भी सामूहिक जीवन के महत्व को और उजागर किया है।

एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि धान और गेहूं की कटाई के बाद किसान पराली और अन्य कूड़े को जला देते हैं। इस पराली को जलाने से भूमि को बहुत क्षति पहुंचती है। भूमि की उर्वरता कम हो जाती है तथा उत्पादन घट जाता है। जलाने की बजाय किसान सीधी बिजाई का तरीका अपना सकते हैं। वे पिछली फसल की खड़ी पराली के बीच ही अगली फसल रोप सकते हैं। सूखी हुई खड़ी फसल धीरे-धीरे खाद में बदल कर फायदेमंद साबित होती है। इस अवसर पर डा. संतोष कुमारी, डा. एसके वर्मा ने भी विचार रखे।

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