चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। यह बेहद खास और उम्‍मीदें जगाने वाला नजारा था, बड़े भाई के घर छोटे भाई के पहुंचने सा। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में हरियाणा के नेताओं की माैजूदगी बड़ा संदेश दे रही थी। हरियाणा और पंजाब चढ़दी कलां रहें... और दोनों में प्यार ऐसे ही बना रहे। बात-बात पर छोटे भाई हरियाणा को आंखें दिखाने वाले बड़े भाई पंजाब का 53 साल के लंबे अंतराल के बाद कुछ इसी तरह का रुख था। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए छोटे भाई हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगवानी गर्मजोशी से की। 

रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली, पंजाब के लचीले रुख से अंतरराज्यीय मसलों के हल के रास्ते खुले

बड़े भाई पंजाब ने पांच दशक बाद छोटू (हरियाणा) को अपने घर (विधानसभा) में आमंत्रित किया तो उसके मुंह से दुआएं ही निकलीं। आखिर हरियाणा कभी पंजाब के जिगर का टुकड़ा हुआ करता था। 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हरियाणा अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। तब से लेकर आज तक दोनों भाइयों के बीच अलग राजधानी, अलग हाई कोर्ट, विधानसभा में पूरी हिस्सेदारी, एसवाईएल के पानी और चंडीगढ़ प्रशासन में अधिकारियों के उचित प्रतिनिधित्व को लेकर टकराव के हालात बने रहे।

कई बार दोनों ने एक साथ बैठने की इच्छा भी जताई, मगर राजनीतिक मतभेदों ने पंजाब व हरियाणा के रास्ते कभी एक नहीं होने दिए। हरियाणा और पंजाब विधानसभा दोनों एक ही परिसर में हैैं। पंजाब के पास भरपूर जगह है तो हरियाणा जगह की कमी से जूझ रहा है। यह पहला मौका था, जब श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में पंजाब ने बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए हरियाणा को अपने घर (विधानसभा) में आमंत्रित किया तो हरियाणा ने पंजाब के घर प्रवेश करने में जरा भी देरी नहीं लगाई।

दोनों भाइयों के बीच राजनीतिक और विवादित मसलों पर हालांकि कोई बातचीत नहीं हुई, लेकिन राजनीति के जानकार लोगों का मानना है कि जब दो भाई एक छत के नीचे मिल-बैठ जाएं तो मसले हल होते देर नहीं लगती। अब इसके लिए माहौल तो बन गया, मगर माकूल समय का इंतजार है।

हरियाणा के विधायकों में लगी रही सेल्फी लेने की होड़

पंजाब व हरियाणा विधानसभा के संयुक्त अधिवेशन में पहुंचे हरियाणा के अधिकतर विधायक ऐसे थे जो पहली बार पंजाब विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए। हरियाणा में 44 विधायक पहली बार सदन पहुंचे। 30 विधायक दोबारा सदन में चुनकर आए, जबकि 16 विधायक ऐसे थे, जो कई बार विधायक रह चुके हैैं। इस दौरान नए विधायकों में सेल्फी लेने की होड़ लगी रही। कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक और जयवीर वाल्मीकि ने एक के बाद एक कई सेल्फी लीं। दोनों ही पुराने विधायक हैैं।

वेंकैया नायडू संग मनोहर लाल, बादल संग दुष्यंत चौटाला

संयुक्त अधिवेशन में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य और मुख्यमंत्री मनोहर लाल उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर और विधानसभा अध्यक्ष केपी सिंह राणा के साथ बैठे।

हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को अति विशिष्ट लोगों के साथ बैठाया गया, जबकि उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ बैठे। हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा थोड़ी देरी से सदन में पहुंचे जिससे उन्हें कांग्रेस के दूसरे विधायकों के साथ सीट साझा करनी पड़ी। इनेलो विधायक अभय चौटाला भी संयुक्त अधिवेशन की कार्यवाही में शामिल हुए।

 

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


यह भी पढ़ें: Kartarpur corridor: पाक की नापाक हरकत, कैप्‍टन का सिद्धू पर निशाना, इमरान 'रियल हीरो' वाले पोस्‍टर से विवाद

Posted By: Sunil Kumar Jha

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप