चंडीगढ़ [सुधीर तंवर]। नारी सशक्तीकरण के लिहाज से हरियाणा में काफी सुधार हुआ है। भ्रूण हत्या पर सख्ती से बेटियां कोख में महफूज हुईं तो राजनीति, सामाजिक, खेल, पुलिस-प्रशासन और नौकरियों में बढ़े अवसरों का फायदा उठा बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां बुलंदियों पर पहुंची। बच्चियों के दुष्कर्मियों को फांसी और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के दोषियों को सख्त सजा का कानून बनने से महिला अपराध में कमी आई है। महिलाओं सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बेहतर नतीजे सामने आए हैं। 

मौजूदा सरकार ने प्रदेश में पहली बार बालिकाओं व महिलाओं के विकास के लिए हरियाणा कन्या कोष का गठन किया, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद मिली। सभी गर्भवती महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना में कवर किया जा रहा है और अभी तक दो लाख 65 हजार 476 महिलाएं इसका लाभ उठा चुकी हैं। हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे चिकित्सा, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, मानसिक और सामाजिक काउंसलिंग, अस्थायी आवासीय सुविधाएं देने के लिए सभी जिलों में वन स्टॉप सेंटर खुल चुके या फिर अंतिम चरण में हैं।

महिला अपराध से निपटने में एक साथ 1150 महिला पुलिस कर्मचारियों की भर्ती अहम साबित होगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पुलिस में महिला कर्मचारियों की संख्या नौ फीसद तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। महिला अपराधों को रोकने के लिए जिला और मंडल स्तर पर महिला थाने खोलने के बाद अब ब्लॉक स्तर पर ऐसे थाने खोलने की तैयारी है।

ऑनलाइन एफआइआर के अलावा दुर्गा रैपिड एक्शन फोर्स, दुर्गा शक्ति वाहिनी व अन्य तरह के एप शुरू करने से महिलाओं को काफी मदद मिली। मौजूदा समय में गांवों में 10 से 19 साल की लड़कियों को 25 फीसद रियायती दरों पर सेनेटरी नैपकिन दिए जा रहे हैं। बीमारियों से बचाने के लिए मिशन इंद्रधनुष के तहत गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और खून की कमी दूर करने के लिए विशेष अभियान से स्वास्थ्य की देखरेख सुनिश्चित हुई। सभी जिलों और खंडों में महिला शक्ति केंद्र खोले जा रहे हैं जहां महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, महिला पुलिस वालंटियर के बारे में जागरूक करते हुए घरेलू हिंसा के मामलों में मदद की जाएगी। नौवीं और दसवीं की छात्राओं को आत्मसुरक्षा के लिए स्कूलों में जहां विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ, वहीं लड़कियों के लिए 31 नए महिला कॉलेज खोलने से अभिभावक अब उनकी सुरक्षा के प्रति चिंतित नहीं रहते।

कन्या कोष के गठन से खुला महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का रास्ता

चुनावी संकल्प पत्र में भाजपा-कांग्रेस और इनेलो ने महिलाओं के कई बड़ी घोषणाएं की हैं। महिलाओं से सर्वाधिक वादे भाजपा ने किए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महिलाओं के लिए कई बड़े कदम उठाने की बात कही है, जिसमें केजी से पीजी तक महिलाओं को मुफ्त शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा को पांच लाख सीसीटीवी कैमरे, सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच, एनीमिया मुक्त बच्चे और महिलाएं, हर कस्बे में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के सामान का बिक्री स्टोर, सार्वजनिक स्थानों पर सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और शहरों में पिंक बस सेवा प्रमुख है।

कांग्रेस ने महिलाओं को नौकरियों में 33 फीसद आरक्षण, रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा, गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म तक 3500 रुपये और बच्चे के पांच साल तक का होने पर पांच हजार रुपये महीना देने की बात कही है। इनेलो ने महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण के साथ ही महिला सुरक्षा, विशेष कौशल प्रशिक्षण केंद्र, गरीब कन्याओं की शादी में पांच लाख का शगुन, गरीब महिलाओं को एक हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा भत्ता और ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त सैनेटरी पैड देने का लक्ष्य रखा है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार की उपलब्धियां

  • दिव्यांग महिला सरकारी कर्मचारियों को चाइल्ड केयर के लिए 1500 रुपये प्रति बच्चा विशेष भत्ता
  • महिलाओं के विकास और उन्नति के लिए च्हरियाणा कन्या कोष’
  • करनाल, रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, भिवानी, हिसार व नारनौल में वन स्टॉप सेंटर सखी स्थापित।
  • पीएनडीटी एक्ट तथा एमटीपी एक्ट का उल्लंघन करने वाले 950 लोगों के खिलाफ केस दर्ज
  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से लिंगानुपात में 47 अंकों का सुधार
  • लिंगानुपात में बेहतरी के लिए हरियाणा को एक राज्य स्तरीय व दो जिला स्तरीय पुरस्कार मिले
  • लिंगानुपात में सुधार के लिए हरियाणा को मिला ‘कानगी देवी’ अवॉर्ड
  • आपकी बेटी-हमारी बेटी योजना के अंतर्गत एक लाख 74 हजार 432 अनुसूचित जाति महिलाओं को लाभ
  • सुकन्या समृद्धि खाता योजना के अंतर्गत डाकघरों में चार लाख 45 हजार 439 महिलाओं के खुले खाते
  • 25 फीसद रियायती दरों पर सेनेटरी नैपकिन दिए जा रहे हैं 10-19 साल की लड़कियों को

हुड्डा सरकार की ये उपलब्धियां

  • महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान की दिशा में हरियाणा राज्य महिला आयोग को वैधानिक दर्जा दिया गया
  • विभागों की जेंडर बजटिंग तथा महिलाओं से संबंधित कानूनों को प्रभावी रूप से लागू करने के कार्य की समीक्षा के लिए स्टेट मिशन अथॉरिटी का गठन
  • ‘इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी विवाह शगुन योजना’ और लाडली जैसी स्कीमों को खूब प्रमोट किया गया

चूल्हे-चौके से निकल सियासत में बढ़ी भागीदारी

चूल्हे-चौके से निकलकर अब सियासी मैदान में महिलाओं का रुतबा बढ़ने लगा है। पंचायत चुनावों में 33 फीसद आरक्षित सीटों के बजाय 44 फीसद महिलाएं जीती, जिससे सियासी दलों का उन पर भरोसा बढ़ा है। पिछले साल पांच निगमों के निर्वाचित हुए मेयरों में दो महिलाएं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां 13 महिलाएं विधायक बनी थी, वहीं इस बार सत्तारूढ़ भाजपा ने 12, कांग्रेस ने नौ, इनेलो ने 15 और जजपा ने सात महिलाओं को टिकट दिए हैं, जिनमें कई महिला प्रत्याशी मजबूत स्थिति में हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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