पराली जलाने वालों पर होगी त्रिस्तरीय कार्रवाई, FIR और चालान के साथ भूमि रिकार्ड में होगी ‘रेड एंट्री’
हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर, चालान और भूमि रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' सहित त्रिस्तरीय कार्रवाई होगी। सरकार ...और पढ़ें
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पराली जलाने वालों पर होगी त्रिस्तरीय कार्रवाई। फाइल फोटो
HighLights
पराली जलाने पर एफआईआर, चालान और 'रेड एंट्री' होगी।
'पराली संरक्षण बल' निगरानी करेगा, रात में गश्त बढ़ेगी।
किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन पर प्रोत्साहन मिलेगा।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर तीन स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे किसानों के खिलाफ न केवल एफआइआर दर्ज की जाएगी, बल्कि चालान भी किया जाएगा और उनके भूमि रिकार्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी। साथ ही निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि भी वसूल की जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में राज्य कार्य योजना की समीक्षा की। पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ गठित किए जाएंगे।
यह बल पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और रोकथाम के साथ-साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, देर शाम और रात के समय गश्त बढ़ाई जाएगी तथा खेतों में आग की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग के लिए किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने का भी प्रविधान किया है। इसके अलावा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद पर सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई
‘पराली संरक्षण बल’ में पुलिस कर्मियों के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नोडल एवं क्लस्टर अधिकारियों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। यह बल जिला और ब्लाक स्तर पर कार्य करेगा तथा खेतों में आग लगने की घटनाओं की निगरानी करने के साथ-साथ पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
धान की कटाई के कार्यक्रम के अनुसार बेलर, रेकर्स तथा अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी को विभिन्न जिलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। सितंबर से यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में धान की कटाई शुरू होती है, जबकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद जैसे जिलों में कटाई का कार्य तेज होता है।
अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों तथा हरियाणा के आसपास के जिलों में मशीनरी के मालिकों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कटाई के समय आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
अंधेरा होते ही पराली बढ़ जाते पराली जलाने के मामले
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ किसानों द्वारा उपग्रहों की निगरानी से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद पराली जलाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और गश्त को और मजबूत किया जा रहा है।
