चंडीगढ़, जेएनएन।  हरियाणा में उद्योग-धंधों का संचालन पटरी पर आ गया है। हरियाणा सरकार ने कंटनेमेंट जोन को छोड़कर पूरे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के संचालन को छूट दे दी है। छोटी-बड़ी 50 हजार से अधिक फैक्ट्रियां शुरू हो चुकी हैं। सरकार ने अभी तक 36 लाख लोगों को फैक्ट्रियां में काम करने की मंजूरी दी है। इन फैक्ट्रियां में काम करने वाले उन मजदूरों ने खुद मालिकों को फोन किया है, जो अपने प्रदेश लौट चुके हैं। अब वे काम करने के लिए दोबारा हरियाणा लौटना चाहते हैैं।

प्रदेश में 50 हजार फैक्ट्रियां चालू, 36 लाख श्रमिक काम पर लौटे

हरियाणा के लिए यह राहत की बात है कि करीब तीन लाख प्रवासी कामगारों ने अब अपने राज्य लौटने का इरादा टाल दिया है। हरियाणा में फिर से औद्योगिक, कामर्शियल व निर्माण गतिविधियां शुरू होने की वजह से इन मजदूरों ने यहीं रुकने का मन बनाया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व झारखंड से बड़ी संख्या में मजदूर लौटना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि केंद्र सरकार रेल सेवा शुरू कर चुकी है। ऐसे में यह मजदूर खुद भी राज्य में लौट सकते हैं। उद्योगपतियों ने इस मुद्दे पर सरकार से भी बात की है। ऐसे में सरकार उन राज्यों से बातचीत करने के लिए भी तैयार है, जहां से यह मजदूर लौटना चाहते हैं। हरियाणा में अभी तक 96 विशेष श्रमिक रेलगाडिय़ों व हरियाणा रोडवेज की बसों के 5500 फेरों से 3 लाख 26 हजार श्रमिकों को उनके गृह जिलों में पहुंचाया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार हरियाणा सरकार ने अपने घर लौटने के इच्छुक श्रमिकों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इस पोर्टल पर करीब सवा आठ लाख श्रमिकों ने अपने राज्य में लौटने की इच्छा जताई थी। प्रदेश में जब फिर से उद्योग-धंधे व अन्य कामर्शियल गतिविधियां शुरू हो गई तो तीन लाख के करीब मजदूरों ने अपने प्रदेश लौटने का विचार त्याग दिया। दो लाख के करीब ऐसे श्रमिक जरूर हैं, जो अपने साधनों या पैदल ही अपने प्रदेश लौटे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मजदूरों को वापस लाने के लिए जो प्रबंध इंडस्ट्री के लोग चाहेंगे सरकार वह पर प्रबंध करेगी। मजदूरों को वापस लाने के लिए प्लानिंग की जा रही है। फैक्ट्रियां को शुरू करने पर अब सरकार की ओर से कोई रोक-टोक नहीं है।

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​​​​​प्रवासी मजदूरों को वापस उनके राज्य भेजने तक सरकार करेगी उनके रहने व खाने का प्रबंध

 

कोरोना संकट के चलते लगाए गए लॉकडाउन के कारण फरीदाबाद और बहादुरगढ़ में फंसे सैकड़ों प्रवासी मजदूरों के मामले को लेकर दायर दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह इनके वापिस भेजे जाने का पूरा इंतजाम कर रही है और जब यह वापिस नहीं जाते हैं तब तक खाने और राशन का पूरा इंतजाम कर रही है।

हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक बाल्यान द्वारा दी गई इस जानकरी के बाद चीफ जस्टिस रवि शंकर झा एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं का निपटारा कर दिया है और कहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि इस दौरान किसी भी प्रवासी मजदुर को खाने और रहने की कोई परेशानी न आए। बहादुरगढ़ के मामले में हरियाणा सरकार ने बताया की याचिका में जिन 42 प्रवासी मजदूरों की बात की गई है उन सभी को वापिस भेजा जा चूका है इतना ही नहीं सिर्फ झज्जर जिले में सरकार ने प्रवासी मजदूरों को 5 लाख 83 हजार फूड पैकेट्स बांटे हैं इसके अलावा 8389 राशन के पैकेट बांटे गए हैं।

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि प्रवासी मजदूरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी राज्यों को उनके वापिस भेजे जाने और खाने की व्यवस्था करने के आदेश दे चूका है। इन आदेशों पर हरियाणा सरकार भी कार्रवाई कर रही है।

इस जानकारी के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर ही रहा है तो ऐसे में अब हाई कोर्ट में इन याचिकाओं पर अलग से सुनवाई किए जाने की जरुरत नहीं है।  लिहाजा हाई कोर्ट ने सरकार को इन प्रवासी मजदूरों को वापिस भेजने और इनके खाने की पूरी व्यवस्था करने के निर्देश देते हुए दोनों जनहित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।

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