हरियाणा में रजिस्ट्री का खेल बदला, बिचौलिये हुए बाहर; तो बढ़ने लगा राजस्व
हरियाणा में पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और राज्य के राजस्व में 9-10% की वृद्धि हुई है।
-1790789143939_m.webp)
हरियाणा में डिजिटल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, बिचौलियों से मुक्ति।
HighLights
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था से बिचौलिये और कागजी काम खत्म
स्टांप ड्यूटी से राज्य का राजस्व 9-10% तक बढ़ा
6.5 लाख से अधिक डिजिटल रजिस्ट्रियां, प्रक्रिया हुई आसान
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन की पुरानी तस्वीर तेजी से बदलने का दावा सरकार ने किया है। तहसीलों के चक्कर, कागजी फाइलें और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने के लिए शुरू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था तहसीलों में बड़े पैमाने पर लागू हो चुकी है।
इसका सबसे अहम पहलू यह है कि प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाने के बावजूद सरकारी खजाने पर इसका दबाव नहीं पड़ा, बल्कि स्टांप ड्यूटी से राज्य का राजस्व करीब 9 से 10 प्रतिशत बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के अनुसार नई पेपरलेस रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 6.5 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां की जा चुकी हैं। करीब 140 तरह की डीड के मानकीकृत प्रारूप तैयार किए गए हैं, जिससे दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान हुई है।
डिजिटल हस्ताक्षर, सुरक्षित प्रमाणीकरण और आधार आधारित प्रक्रिया को व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। अब नागरिक बिचौलिये की मदद लिए बिना ऑनलाइन अपनी डीड प्रस्तुत कर सकते हैं।
एक डीड दो बार से ज्यादा वापस नहीं
नई व्यवस्था में फाइलों को बार-बार आपत्तियों के नाम पर वापस भेजे जाने की गुंजाइश भी सीमित कर दी गई है। अधिकारियों को किसी डीड को सुधार के लिए अधिकतम दो बार ही वापस करने की अनुमति दी गई है। विपुल गोयल ने बताया कि दस्तावेज ऑनलाइन जमा होने के बाद राजस्व अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में उसकी जांच करनी होगी।
कर छूट और प्रोत्साहनों की भी होगी समीक्षा
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के अनुसार, सरकार का लक्ष्य केवल रजिस्ट्री को डिजिटल करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को नागरिक की नजर से सरल बनाना है। इसी सोच के तहत अब कर छूट और प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की जा रही है।
सरकार यह देखेगी कि किस रियायत का स्पष्ट नीतिगत उद्देश्य है, उससे कितना आर्थिक लाभ मिल रहा है और मध्यम अवधि में उसका राजस्व पर क्या असर पड़ता है। हरित विनिर्माण, सर्कुलर इकोनामी, लाजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में लक्षित प्रोत्साहनों पर जोर रहेगा। कारोबारियों के लिए बार-बार नियम बदलने के बजाय आवश्यक बदलावों को एक साथ नीति-पैकेज के रूप में लागू करने पर जोर दिया जाएगा।
