जासं, पंचकूला : नागरिक अस्पताल सेक्टर-6 की एक नर्स भी कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। यह महिला खड़क मंगोली की कोरोना पॉजिटिव महिला के संपर्क में आई थी। इस तरह पंचकूला में अब तक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दो हो गई हैं। नर्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद नागरिक अस्पताल सेक्टर-6 के स्टाफ में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सिविल सर्जन डॉक्टर जसजीत कौर ने इस बात की पुष्टि की है। नर्स को आइसोलेशन में रख दिया गया है। परिवार के लोगों की भी होगी जांच

अधिकारियों के मुताबिक नर्स के परिवार व उसके संपर्क में आए अन्य छह लोगों की भी जांच की जाएगी। इल छह लोगों में कोरोना ग्रस्त स्टॉफ नर्स के दो बच्चे, सास, ससुर और मकान मालिक पति-पत्नी शामिल हैं। इन सभी के भी सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। सीएमओ डॉ. जसजीत कौर ने बताया कि जनरल अस्पताल की स्टाफ नर्स की भी रिपोर्ट कोरोना वायरस पॉजिटिव आई है। उसे आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया है। लंदन से चंडीगढ़ आई संक्रमित महिला की बनी कारण

स्टाफ नर्स ने पहली कोरोना पॉजिटिव मरीज का ट्रीटमेंट किया था। पंचकूला में पहली कोरोना वायरस संक्रमित महिला ने चंडीगढ़ की उस युवती की मसाज की थी, जोकि लंदन से चंडीगढ़ आई थी। इसके बाद ही महिला को डॉक्टरों ने संदिग्ध मान अस्पताल में दाखिल किया था। उसके सैंपल की जांच के बाद उसमें कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। स्टाफ नर्स ने भी कोरोना पॉजिटिव महिला का ड्यूटी के वक्त मोबाइल फोन ही छुआ था, जिसके बाद अब वो भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है।

चार और नर्सो और एक वार्ड ब्वाय की भी कराई गई थी जांच

इस स्टाफ नर्स को महिला के पॉजिटिव आने के बाद से 21 मार्च को ही आइसोलेशन में रखा गया था, जिनके साथ 4 और स्टाफ नर्स व एक वार्ड ब्वाय को भी दाखिल किया गया था। इस दौरान जब सबके सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजे थे, तो जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बाद मंगलवार को 10 दिन बाद जाकर इस नर्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

जासं, पंचकूला : नागरिक अस्पताल सेक्टर-6 की नर्स के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा की महासचिव वीनिता बांगड़ ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बांगड़ का कहना है कि जिस स्टाफ नर्स की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है, उसकी ड्यूटी पिछले दिनों अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में थी। वार्ड में कोरोना पॉजिटिव पीड़ित एक महिला भर्ती थी। विभाग ने इस महिला के संपर्क में आई अन्य नर्सों के टेस्ट दो दिन बाद ही करा दिए थे, जो नेगेटिव आई। जबकि डब्ल्यूएचओ के निर्देंशों के अनुसार मरीज के संपर्क में आने के बाद यह टेस्ट पांच से सात दिन बाद भी कराए जाने चाहिए थे। स्टाफ नर्स ने उस समय कहा था कि वह पांच दिन बाद सैंपल देगी और उसने खुद को घर में क्वारंटाइन कर लिया। डॉक्टर से पूछने पर जवाब मिला की लक्षण नहीं है, तो टेस्ट की जरूरत नहीं है। आरोप लगाया कि विभाग ने स्टाफ नर्स के केस को ठीक से 'फालो' नहीं किया। स्टाफ नर्स खुद अपना सैंपल देने आई। पहले डॉक्टर ने सैंपल ठीक से नहीं लिया। दोबारा सैंपल भेजा गया तो वह पॉजिटिव आया। उन्होंने स्टाफ नर्स के इलाज के देरी के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। महासचिव ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने नर्सों को उचित पीपीई किट, एन-95 मास्क आदि उपलब्ध नहीं कराया तो नर्सिंग स्टाफ डूयूटी से पीछे हटने को मजबूर होंगी।

Posted By: Jagran

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