चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री थे, तब जहां भी रात बिताते थे, वहां अगले दिन टेनिस कोर्ट में अपने संगी-साथियों के साथ लान टेनिस जरूर खेलते थे। अब थोड़ा फर्क आया है। जब से वह कांग्रेस विधायक दल के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, तब से उनकी व्यस्तताएं बढ़ गई हैं। कांग्रेस हाईकमान से भी उन्हेंं दो-चार होना पड़ता है। अब लान टेनिस मौका मिलने ही खेलते हैं, लेकिन राजनीति का खेल हर समय चलता रहता है। दो दिन पहले हुड्डा अपने पुराने साथी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश उर्फ जेपी और पूर्व विधायक जयतीर्थ दहिया के साथ टीकरी बार्डर पर चले गए। वहां उन्होंने दर्शकों की सबसे पीछे की दीर्घा में बैठकर कबड्डी के खेल देखने का आनंद उठाया। उन्हेंं कबड्डी का खेल देखते लोगों ने चुटकी ली, हुड्डा प्रयास तो बहुत कर रहे, लेकिन विपक्षी दल के किसी खिलाड़ी को आउट नहीं कर पा रहे हैं।

चाचा पर गुगली फेंकने की तैयारी में भतीजा

हरियाणा में चाचा और भतीजे के बीच लंबे समय से चल रही राजनीतिक जंग का कोई ठौर नहीं है। कभी चाचा अभय सिंह चौटाला का दांव भारी तो कभी भतीजे दुष्यंत चौटाला का वार भारी। किसान आंदोलन के बीच चाचा अभय चौटाला ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा क्या दिया, भतीजे दुष्यंत उसमें मीन-मेख निकालने में जुट गए। उन्हेंं विधानसभा सचिवालय के एक्सपर्ट की भी इसमें मदद मिल रही है। आखिरकार एक शब्द असंवेदनशील पकड़ में आ गया। चाचा ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह इस असंवेदनशील विधानसभा के सदस्य नहीं रहना चाहते। अब भतीजे दुष्यंत इस शब्द पर राजनीति खेलने की तैयारी कर रहे हैं। विधानसभा को असंवेदनशील बताने को आधार बनाते हुए भतीजे की टीम चाचा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाने में जुट गई है तो चाचा भी भतीजे की इस गुगली का पूर्वानुमान लगाकर अफेंसिव शाट खेलने के फिराक में हैं।

विमान के सभी यात्री अपनी पेटियां कस लें

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा विधानसभा में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के एलान के बाद डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सतर्क हो गए हैं। उनकी पार्टी जजपा के 10 विधायक हैं, जिनके सहयोग से 40 विधायकों वाली भाजपा की सरकार सरपट दौड़ रही है। करनाल के कैमला गांव में भाजपा का मंच तोड़ने के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ दुष्यंत प्रधानमंत्री व अमित शाह से मिले, उसे देखकर लग रहा कि उड़ान से पहले पेटियां कस लेने की लेनी की तैयारी हो रही है, क्योंकि बजट सत्र में हुड्डा गेम करने से शायद ही चूकें। मनोहर लाल ने निर्दलीय विधायकों और दुष्यंत ने जजपा विधायकों संग लंच कर अपनी पेटियां मजबूती से कस ली, लेकिन दुष्यंत को यह अच्छी तरह से चेक करने की जरूरत है कि कहीं उनके हवाई जहाज की सवारियों की कोई पेटी ढीली न रह जाए।

सिपाही-चोर का खेल

हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस का कोई जवाब नहीं। ट्रैफिक नियमों को तोडऩे वालों के चालान काटना और उन्हेंं जागरूक करना अच्छी बात है, लेकिन नियमों का अनुपालन कराने की आड़ में लुका-छिपी का खेल खेलना इन राज्यों की पुलिस की फितरत बन गई है। चंडीगढ का कोई ऐसा चौराहा नहीं होता, जहां यह पुलिस वाले किसी बड़े पेड़ के तने के पीछे चोरों की तरह छिपकर खड़े न रहते हों। किसी व्यक्ति ने नियम तोड़ा या गलती से टूट गया तो ऐसे दौड़कर झपट्टा मारते हैं, जैसे बाज को शिकार मिल गया। विभिन्न राज्यों के कम पढ़े लिखे व्यक्ति जब गाड़ी लेकर चंडीगढ़ या पीजीआइ आते हैं और गलती से उनसे कोई अनियमितात हो जाए तो इन पुलिस वालों की चांदी हो जाती है। हाई कोर्ट ने इन पुलिस वालों को यह तो कभी नहीं कहा होगा कि आप पेड़ के पीछे छिपकर ही लोगों को कानून का पाठ पढ़ाओ।  

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