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'राम रहीम के बरी होने पर विचार जरूरी', पत्रकार छत्रपति मर्डर केस में बेटे की अपील पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Published: Mon, 10 Aug 2026 08:54 PM (IST)Updated: Tue, 11 Aug 2026 12:11 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी करने के पंजाब एवं हरियाणा हाई ...और पढ़ें

राम रहीम की बरी होने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई। फाइल फोटो

राम रहीम की बरी होने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई। फाइल फोटो

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने राम रहीम की रिहाई पर सुनवाई को स्वीकारा

  2. पत्रकार छत्रपति के बेटे ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी

  3. राम रहीम दुष्कर्म मामले में पहले से ही जेल में बंद

डिजिटल डेस्क, पंचकूला। सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सिरसा में 2002 में हुए पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी किए जाने के पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले पर विचार की जरूरत है। 58 वर्षीय गुरमीत रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।

वह 2017 में दो शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई 20 साल की सजा काट रहा है। पीठ में दो अन्य न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और वी. मोहना हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार के बेटे अरिदमन की ओर से दाखिल याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए अगले सप्ताह में सूचीबद्ध किया है।

डेरामुखी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने कोई अपील दाखिल नहीं की है। इस पर पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि को पलट दिया है।ॉ

गोली मारकर की थी हत्या

रामचंद्र छत्रपति ने सिरसा से प्रकाशित अपने अखबार ‘पूरा सच’ में डेरा मुख्यालय में महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण से संबंधित एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था। अक्टूबर 2002 में हरियाणा के सिरसा में उनके घर के बाहर उन्हें गोली मार दी थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

डेरामुखी को साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया था। 2006 में जांच सीबीआइ को सौंप दी थी। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआइ अदालत ने गुरमीत और तीन अन्य आरोपितों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

24 साल बाद भी न्याय की उम्मीद लिए हुए हैं अंशुल

छत्रपति डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह के खिलाफ अंशुल छत्रपति लगातार न्यायिक लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके पिता पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की 24 अक्टूबर 2002 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

मामले में 11 जनवरी 2019 को डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह समेत चार आरोपित दोषी ठहराए गए और 17 जनवरी 2019 को गुरमीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सात मार्च 2026 को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरमीत सिंह को बरी कर दिया, तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी। अंशुल ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

तारीखों में छत्रपति हत्याकांड मामला...

  • 24 अक्टूबर 2002: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की सिरसा में गोली मारकर हत्या।
  • 11 जनवरी 2019: गुरमीत सिंह समेत चार आरोपित दोषी करार।
  • 17 जनवरी 2019: गुरमीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
  • 7 मार्च 2026: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरमीत सिंह को बरी किया, तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी।
  • 10 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अंशुल की अपील स्वीकार की।

हाई कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। मेरे पिता की हत्या डेरे के प्रमुख के इशारे पर की गई थी, जिसे सीबीआइ ने साबित किया था। हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। -अंशुल छत्रपति, रामचंद्र छत्रपति के पुत्र