मोरनी [धर्म शर्मा]। नाबार्ड की योजनाओं के बारे में मेंं किसानों को जानकारी देने पहुंचे दो डॉक्टरों बड़ी आफत में फंस गए। दरअसल, उन्होंने अपनी कार घग्गर नदी के पास खरक गांव मेंं खड़ी कर दी और खुद सूखी नदी को पार कर गांंव कोल्यों- बेहणी में किसानों से बात करने लगे। अभी वह ही रहे थे कि अचानक हिमाचल की तऱफ से तेज बहाव से पानी आने लगा। देखते ही देखते उनकी कार तक पानी पहुंच गया। तेज बहाव में उनकी कार बहने लगी। फिर किसी तरह से ग्रामीणों ने रस्सी बांधकर कार को तेज बहाव से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। 

बरसात का मौसम मोरनी क्षेत्र के नदी किनारे बसे गांवों के लिए आफत लेकर आता है। नदी के आरपार जाने के लिए कोई स्थाई साधन न होने के कारण ग्रामीणों को अक्सर जान का जोखिम लेकर नदी पार करनी पड़ती है। कई बार बारिश अधिक होने पर नदी किनारे बसे घरों के बहने का खतरा तक हो जाता है। शनिवार को भी नदी में अचानक तेज बहाव से पानी आ गया। 

तेज बहाव की सूचना मिलते ही ग्रामीण व डॉक्टर नदी की तरफ भागे। नदी के पास पहुंंचने पर उन्होंने देखा कि गाड़ी को नदी के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए गाड़ी को किसी तरह रस्सियों से बांधा व रस्सियों को पेड़ों से बांधकर गाड़ी को रोक लिया। गाड़ी में डॉक्टरों का लैपटॉप व कुछ दवाइयां आदि भी थी जो पानी में भीग गई।

ग्रामीण रत्न सिंह, मोहन सिंह, इंद्र सिंह, होशियार, सुमित, चरण सिंह, बाबू राम, दयाल सिंह व टेक सिंह का कहना है कि झूला पुल से आगे काफी गांव हैं जो अपने वाहन नदी के पास खड़े कर अपने घर जाते हैं। यदि बाद में नदी में अधिक पानी आ जाए तो इन वाहनों को बहने का डर ग्रामीणों को सताता रहता है।

इसके अलावा किसानों को अपनी फसलों को मंडी तक ले जाने के लिए झूला पुल के पास सड़क तक ढोना पड़ता है। गांववासियों ने उपायुक्त पंचकूला व जिला प्रशासन से मांग की कि नदी आरपार करने के लिए झूला पुल के स्थान पर कंक्रीट पुल बनाया जाए।

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Posted By: Kamlesh Bhatt