यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बेटे ने पिता, भाई-भाभी पर संपत्ति हड़पने का आरोप, केस दर्ज
मनसा देवी कांप्लेक्स पुलिस थाने में एक व्यक्ति ने पिता भाई व भाभी सहित दो अन्य पर धोखाधड़ी कर संपत्ति ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पंचकूला : मनसा देवी कांप्लेक्स पुलिस थाने में एक व्यक्ति ने पिता, भाई व भाभी सहित दो अन्य पर धोखाधड़ी कर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में संजीत मलिक ने बताया कि उसकी मां का देहांत दो मार्च 2016 को हो गया था। उसकी मा के पास हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कई चल अचल संपत्ति थी। मृत्यु से पहले उन्होंने कोई वसीयत नहीं की थी। मां की मौत के बाद उनके कानूनी तौर पर तीन उत्तराधिकारी थे। इसमें संजीत के पिता रणधीर सिंह मलिक, भाई विनीत मलिक और वह खुद (संजीत मलिक)। कानून के अनुसार मां की मौत के बाद उनकी संपत्ति को समान रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाना था। मां की संपत्ति की देखभाल संजीत के पिता रणधीर सिंह मलिक करते थे।
संजीत का आरोप है कि मां की मौत के बाद संजीत के पिता रणधीर मलिक, उसके भाई विनीत और विनीत की पत्नी रेनू ने धोखाधड़ी करके झूठी वसीयत तैयार कर ली। वसीयत एक अगस्त 2015 की बताई जा रही थी। आरोप है कि बड़े भाई ने इस झूठी वसीयत के आधार पर मां की दो संपत्तियां ले ली और उसे विश्वास दिलाया कि वसीयत सत्य और वास्तविक है।
संजीत ने कहा कि उसे अपने पिता पर भरोसा था, इसलिए उसने कभी संदेह नहीं किया, लेकिन दो वर्ष पूर्व संजीत के बड़े भाई विनीत और उनकी पत्नी रेनू मलिक का व्यवहार बदल गया। मार्च 2021 में विनीत और उसकी पत्नी रेणू ने वैली एस्टेट मनसा देवी कंपलेक्स में घर में रखी मूल्यवान संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद संजीत को शक हुआ और उसने अपनी मां की संपत्ति के कागजात की जांच शुरू की। 12 जुलाई 2021 को उप पंजीयक पंचकूला के कार्यालय से अपनी मां की वसीयत की प्रमाणित प्रति भी प्राप्त की। उसे जानकर आश्चर्य हुआ कि कथित वसीयतना में एक अगस्त 2015 पर मेरी मां के हस्ताक्षर एवं पंजीयक पर किए गए हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद उन्होंने एससीओ नंबर 18 स्वस्तिक विहार सेक्टर 5 के कागजात, पासपोर्ट की प्रति, काकेरी कृष्णा को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के कागजात जिस पर उसकी मां के हस्ताक्षर थे, को वसीयतनामे पर दर्ज हस्ताक्षरों से मेल करवाया, तो वह फर्जी पाए गए। उनकी माता के हस्ताक्षर अवैध रूप से संपत्ति हड़पने के लिए रणधीर सिंह मलिक, विनीत मलिक, रेनू मलिक ने कविता ठाकुर और भुवनेश सक्सेना के साथ मिलकर जाली तौर पर वसीयतनामा तैयार करवाए। उन्होंने अपने पिता से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस षड्यंत्र में संजीत मलिक ने कविता ठाकुर के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।
