भाजपा की कमान संभालते ही स्मृति ईरानी के सामने आई कई चुनौतियां, हरियाणा की जमीन पर कितना सफल रहेगा दिल्ली का अनुभव?
भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया है, जिनके सामने 2029 के विधानसभा चुनावों ...और पढ़ें

हरियाणा बीजेपी प्रभारी स्मृति ईरानी (फाइल फोटो)
HighLights
स्मृति ईरानी हरियाणा भाजपा की नई प्रभारी नियुक्त
2029 विधानसभा चुनाव में चौथी बार सरकार बनाने की चुनौती
संगठन, सरकार, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय पर रहेगा जोर
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हरियाणा के संगठन की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को सौंपकर केवल प्रभारी नहीं बदला है, बल्कि राज्य संगठन के लिए एक ऐसा चेहरा चुना है, जिसके पास सत्ता, संगठन और जनसंपर्क, तीनों स्तरों का बड़ा अनुभव हासिल है।
भाजपा ने उन्हें हरियाणा के साथ छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त कर उनकी संगठन क्षमता और नेतृत्व पर भरोसा जताया है। स्मृति ईरानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती साल 2029 में होने वाले विधानसभा चुनाव में चौथी बार भाजपा सरकार की वापसी कराने की होगी।
कैसी रहेगी स्मृति ईरानी की भूमिका
हरियाणा में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद अब संगठन को केवल चुनावी मशीनरी के रूप में नहीं, बल्कि अगले राजनीतिक चक्र की तैयारी करने वाले ढांचे के रूप में मजबूत करना चाहेगी।
ऐसे में स्मृति ईरानी की भूमिका सरकार और संगठन के बीच बेहतर संवाद, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जमीनी फीडबैक को ऊपर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
उनकी सार्वजनिक राजनीतिक शैली और राष्ट्रीय स्तर पर संवाद का अनुभव पार्टी को हरियाणा के मुद्दों को व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण (नैरेटिव) से जोड़ने में मदद दे सकता है।
स्मृति ईरानी का भाजपा संगठन से जुड़ाव केवल केंद्रीय मंत्री या राष्ट्रीय महामंत्री बनने तक सीमित नहीं रहा है।
वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य, महाराष्ट्र भाजपा युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष, महाराष्ट्र भाजपा की प्रदेश सचिव, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इसी साल अगस्त में उन्हें भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।
ऐसे में उन्हें संगठन चलाने का व्यापक और लंबा अनुभव हासिल है, जिसका लाभ हरियाणा भाजपा को मिलने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
हरियाणा भाजपा के लिए स्मृति ईरानी की नियुक्ति की वास्तविक अहमियत इसी में होगी कि वह संगठन को केवल चुनाव के समय सक्रिय होने वाली संरचना से आगे ले जाकर लगातार संवाद करने वाले राजनीतिक संगठन में कितना बदल पाती हैं।
उनकी राष्ट्रीय पहचान पहले से मौजूद है। अब परीक्षा हरियाणा की स्थानीय राजनीतिक बारीकियों को समझकर उस पहचान को संगठनात्मक परिणाम में बदलने की होगी।
महिला नेतृत्व का हरियाणा कनेक्ट और संगठन के सामने असली कसौटी
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के महिला मोर्चा के राष्ट्रीय नेतृत्व का अनुभव हरियाणा के लिए अलग तरह का अवसर पैदा करने वाला होगा।
हरियाणा में महिला मतदाताओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, महिला कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका देने और महिलाओं से जुड़े स्थानीय मुद्दों को संगठन के एजेंडे में प्रमुखता देने की दिशा में भाजपा उनके अनुभव का लाभ उठाने का कोई मौका नहीं चूकेगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय संभालने के दौरान भी उन्हें देशभर में महिला और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर काम करने का प्रशासनिक अनुभव मिला था।
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स्मृति ईरानी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं
हरियाणा भाजपा की प्रभारी स्मृति ईरानी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। संगठन में सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को लगातार सक्रिय रखना, स्थानीय नेताओं के बीच बेहतर समन्वय, बूथ स्तर तक संगठन की ऊर्जा बनाए रखना और युवाओं तथा महिलाओं को पार्टी की अगली पंक्ति में अधिक जगह देना ऐसी बड़ी कसौटियां होंगी, जिन पर उनकी परीक्षा होने वाली है।
हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने और प्रभारी की नई जिम्मेदारी आने से टीम के भीतर भूमिकाओं और प्राथमिकताओं का तालमेल भी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
दिल्ली की राजनीति के अनुभव का मिलेगा हरियाणा को फायदा
स्मृति ईरानी अपने अनुभव का सबसे प्रभावी इस्तेमाल हरियाणा में बखूबी कर सकती हैं। दिल्ली के राजनीतिक अनुभव को हरियाणा, राजधानी चंडीगढ़ और जिलों की जमीनी राजनीति से जोड़कर चलना उनके लिए आसान होगा।
राष्ट्रीय मुद्दों की भाषा को हरियाणा के स्थानीय सरोकारों में बदलना, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद की व्यवस्था बनाना और संगठन के भीतर फीडबैक की ऐसी प्रणाली तैयार करना, जिसमें फैसले केवल ऊपर से नीचे न आएं, बल्कि नीचे से ऊपर भी जाएं, यह उनके कार्यकाल की दिशा तय करेगा।
