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हरियाणा के शहरों में नई कॉलोनी बसाने के लिए कड़े हुए नियम, एक गलती और तुरंत निरस्त हो जाएगा आवेदन

Published: Tue, 29 Sep 2026 05:43 PM (IST)

हरियाणा सरकार शहरी क्षेत्रों में नई कॉलोनियों की स्थापना के लिए नियमों को सख्त कर रही है, जिससे कॉलोनाइजरों की जवाबदेही बढ़ेगी और खरीदारों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

शहरों में नई कॉलोनियां बसाने के नियम होंगे सख्त, डेवलपर्स की बढ़ेगी जिम्मेदारी।

शहरों में नई कॉलोनियां बसाने के नियम होंगे सख्त, डेवलपर्स की बढ़ेगी जिम्मेदारी।

HighLights

  1. शहरी कॉलोनियों के लिए हरियाणा में नियम सख्त किए जा रहे हैं

  2. कॉलोनाइजरों की जवाबदेही बढ़ेगी, खरीदारों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

  3. पर्यावरण अनुकूल कॉलोनियों में सौर ऊर्जा, जल पुनर्चक्रण अनिवार्य होगा

सुधीर तंवर, चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में नई कॉलोनियां स्थापित करने के लिए नियम सख्त होने जा रहे हैं। बदले नियमों से न केवल कालोनाइजर की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि प्लाट-फ्लैट खरीदने वाले लोगों को बेहतरीन सुविधाएं भी सुनिश्चित होंगी।

नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन नियमों में बदलाव का प्रारूप जारी करते हुए 30 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगें हैं।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत कॉलोनी लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया, कमियां दूर करने, लेआउट प्लान तैयार कराने, लाइसेंस अस्वीकार करने और पर्यावरण अनुकूल कम घनत्व वाली कॉलोनियों के लिए कई नई शर्तें प्रस्तावित की गई हैं। आपत्ति या सुझाव लिखित रूप में नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक कार्यालय में प्राप्त किए जाएंगे।

प्रारूप के मुताबिक नियम-6 को बदलने का प्रविधान है। इसके तहत भूमि मालिक आवेदन करते समय कुछ निर्धारित योजनाएं और दस्तावेज निदेशक से तैयार कराने का अनुरोध कर सकेगा। इसके लिए 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क देना होगा। इससे आवेदन के लिए जरूरी लेआउट प्लान एवं संबंधित दस्तावेज तैयार कराने का विकल्प उपलब्ध होगा।

नियम-7 में प्रस्तावित बदलाव के अनुसार निर्धारित फार्म के साथ जरूरी दस्तावेज और प्लान लगाए बिना आवेदन वैध नहीं माना जाएगा। हालांकि आवेदन में कमियां पाए जाने पर उन्हें दूर कर 60 दिन के भीतर दोबारा आवेदन जमा करने पर स्क्रूटनी फीस जब्त नहीं होगी। विभाग को आवेदन मिलने के 90 दिन के भीतर अपनी टिप्पणियां बतानी होंगी।

यदि आवेदक 60 दिन में कमियां दूर कर नियमों की अनुपालना नहीं करता है तो एलसी-1 फार्म में आवेदन स्क्रूटनी फीस जब्त करते हुए वापस किया जा सकेगा और दोबारा आवेदन के लिए कारण भी बताए जाएंगे। यदि निदेशक आवेदन से संतुष्ट नहीं होते हैं तो आवेदन प्राप्त होने की तारीख से छह माह के भीतर उसे अस्वीकार किया जा सकेगा।

तकनीकी रूप से कमजोर प्लान तो लाइसेंस होगा खारिज

प्रस्तावित नियम-9 के तहत निदेशक जांच करने और आवेदक को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद लिखित आदेश से लाइसेंस आवेदन अस्वीकार कर सकेंगे। आवेदन का निर्धारित नियमों के अनुरूप न होने, विकास कार्यों के प्लान और डिजाइन का तकनीकी रूप से मजबूत एवं कार्य योग्य न होना या जलापूर्ति तथा बाहरी सीवर संबंधी अनुमानित खर्च का कॉलोनी के आकार के अनुरूप न होना पर आवेदन निरस्त किया जा सकेगा।

पर्यावरण अनुकूल कॉलोनियों में सौर ऊर्जा और जल पुनर्चक्रण जरूरी

कम घनत्व वाली पर्यावरण अनुकूल कॉलोनियों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के साथ ही वर्षा जल के भंडारण, शुद्धिकरण, वितरण और पुनर्चक्रण की एकीकृत व्यवस्था करनी होगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था, खेती, फ्लशिंग और घरेलू जरूरतों के लिए अलग वितरण प्रणाली का प्रविधान किया गया है। कॉलोनी में जैविक कचरे के उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए कंपोस्ट प्लांट स्थापित करना होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में आवासीय घनत्व को अधिकतम 25 व्यक्ति प्रति एकड़ तक सीमित करने का भी प्रावधान है।

दस्तावेजों के साथ देनी होगी जरूरी जानकारी

नए प्रस्तावित एलसी-1 फार्म में भूमि मालिक, डेवलपर, जमीन का क्षेत्रफल, राजस्व संपदा, तहसील, जिला, सेक्टर और विकास योजना समेत विस्तृत जानकारी मांगी गई है। भूमि से संबंधित रजिस्टर्ड बिक्री विलेख, म्यूटेशन, जमाबंदी और सजरा प्लान जैसे दस्तावेज भी संलग्न करने होंगे। डेवलपर को अपने पूर्व लाइसेंसों और अन्य कानूनों के तहत मिली अनुमतियों की जानकारी भी देनी होगी।

यह जानकारियां भी देनी होंगी

  • जमीन पर किसी तरह का रहन/गिरवी, पट्टा या लीज है या नहीं।
  • जमीन से संबंधित कोई मुकदमा या न्यायालय का आदेश है या नहीं।
  • जमीन किसी अधिग्रहण में शामिल है या नहीं।
  • भूमि मालिक या सहयोगी डेवलपर के खिलाफ दिवालियापन की कार्रवाई चल रही है या नहीं।
  • कॉलोनी तक मौजूदा और प्रस्तावित सड़क संपर्क का विवरण।
  • डेवलपर की पूर्व कॉलोनियों, लाइसेंस और बकाया राशि का विवरण।
  • इंजीनियर, आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर जैसे तकनीकी विशेषज्ञों की जानकारी।
  • आवेदक को क्षतिपूर्ति बांड भी देना होगा। इसमें आवेदन में गलत जानकारी, तथ्यों को छिपाने, राजस्व दस्तावेजों में विसंगति या सरकारी एजेंसी द्वारा किए जाने वाले बाहरी विकास कार्यों में देरी से होने वाले नुकसान से विभाग को सुरक्षित रखने का प्रविधान है।