विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हरियाणा के रोहतक में दो बच्चियों से छेड़छाड़, ग्रामीणों के हस्तक्षेप से समझाैता; हाईकोर्ट का FIR रद करने से इनकार

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:26 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोहतक में दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर रद करने की मांग ...और पढ़ें

दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ केस में हाईकोर्ट का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ केस में हाईकोर्ट का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. बहुअकबरपुर थाने में 23 दिसंबर 2024 को हुई थी एफआईआर।

  2. निजी समझौता कानून के उद्देश्य पर हावी नहीं हो सकता।

  3. पॉक्सो मामले निजी विवाद नहीं, व्यापक सामाजिक प्रभाव।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोहतक जिले में दो नाबालिग बच्चियों से कथित छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर रद करने की मांग खारिज कर दी है। ग्रामीणों और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप के चलते समझौता होने पर एफआईआर रद करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी।

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक सामाजिक हित को प्राथमिकता देना जरूरी है। शिकायतकर्ता पक्ष के समझौते से गंभीर आरोपों में चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त नहीं की जा सकती।

जस्टिस नीरजा के कलसन की पीठ अशोक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने बहुअकबरपुर थाने में 23 दिसंबर 2024 को दर्ज एफआईआर रद करने की मांग की थी। मामला पाॅक्सो अधिनियम की धारा 12 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 126, 75(2) और 79 के तहत दर्ज हुआ था।

साथ चलने के लिए रुपये देने की पेशकश 

शिकायत के अनुसार, 23 दिसंबर 2024 को करीब 11 और 13 वर्ष की दो बच्चियां किराना सामान खरीदकर घर लौट रही थीं। आरोप है कि रास्ते में याचिकाकर्ता ने उन्हें रोका, अश्लील इशारे किए और अपने साथ चलने के लिए रुपये देने की पेशकश की। घबराई बच्चियों ने घर पहुंचकर परिजनों को घटना बताई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता को आपत्ति नहीं

याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के बीच 7 अप्रैल 2025 को समझौता हो गया है। शिकायतकर्ता पक्ष को मुकदमा आगे बढ़ाने पर आपत्ति नहीं है, इसलिए शांति और आपसी सौहार्द के लिए एफआईआर रद की जाए।

सरकार ने बच्चियों के पक्ष में की पैरवी

हरियाणा सरकार ने मांग का विरोध करते हुए बताया कि दोनों बच्चियों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए गए थे। जांच में आरोपों से संबंधित सामग्री मिलने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया। निचली अदालत आरोप तय कर चुकी है और अभियोजन पक्ष के चार गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं।

हाईकोर्ट ने कहा-ऐसे अपराध निजी विवाद नहीं 

हाईकोर्ट ने कहा कि पाॅक्सो अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है। ऐसे अपराध महज दो पक्षों के बीच का निजी विवाद नहीं होते, बल्कि उनका व्यापक सामाजिक प्रभाव होता है।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि समझौते के आधार पर मामला रद करने का निर्णय अपराध की प्रकृति, गंभीरता और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखकर ही लिया जा सकता है।

अब निचली अदालत करेगी निर्णय

पीठ ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद केवल समझौते के आधार पर कार्यवाही समाप्त करना उचित नहीं होगा। अदालत ने एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद करने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

साथ ही स्पष्ट किया कि आदेश की टिप्पणियों को मामले के अंतिम गुण-दोष पर राय न माना जाए। मुकदमे का निर्णय निचली अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करेगी।