जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है। इससे बस सेवाएं सामान्य हो गई हैं। मंगलवार को कर्मचारियों ने 4000 से अधिक बसों का चक्‍का जाम कर दिया था। इस कारण राज्‍य में बस सेवाएं ठप हो गई थी और यात्री इधर से उधर भटक रहे। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी 700 निजी बस कांट्रैक्‍ट पर किलोमीटर स्‍कीम के तहत चलाने के राज्‍य सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

राज्‍य में रोडवेज कर्मचारियों ने कई जगहों पर सोमवार रात करीब 10-11 बजे से ही बसों का चलना बंद कर दिया था। हिसार में मंगलवार को हड़ताल होने की जानकारी मिलने के बाद लोग सोमवार रात को ही आवश्‍यक कार्य के लिए जाने को बस स्‍टैंड पहुंचे, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों ने रात में 10-10.30 बजे ही बसों का परिचालन बंद कर दिया। कर्मचारियों ने रात में ही स्‍टैंड पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

इससे यात्री परेशान हो गए और दूर दराज के यात्रियों को भारी परेशनी हुई। उन्‍होंने किसी तरह बस स्‍टैंड पर रात गुजारी। सुबह से भी यहां बसें नहीं चलीं और यात्री भटक रहे। हड़ताली कर्मचारियों  ने  छोटे रुटों पर चलने वाली बसों का परिचालन भी बाधित किया। बस स्‍टैंड और अासपास के क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहे।

रोहतक में भी रोडवेज कर्मचारियों ने सोमवार रात से ही बसों का चक्‍का जाम कर दिया था। उन्‍होंने बसों को डिपो से नहीं निकलने दिया। इससे हड़ताली कर्मचारियों और बस लेकर जा रहे कर्मचारियों के बीच झड़प हो गई। इस कारण पुलिस बुलानी पड़ी। मंगलवार सुबह से यहां से रोडवेज की कोई बस नहीं चली। इस कारण लोगों को भारी परेशानी हुई। सबसे अधिक दिक्‍कत दिल्‍ली में नौकरी करने वाले लोगों और विद्यार्थियों को हो हुई।

रोहतक में सोमवार देर रात एक बस को रोकते हड़ताली कर्मचारी।

कैथल, भिवानी, पानीपत, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, झज्‍जर सहित राज्‍य के सभी जिलों में हरियाणा रोडवेज की बसें नहीं चलीं। बस कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रेलवे स्‍टेशनों पर भारी भीड़ नजर आई। सिरसा बस स्‍टैंड पर रोडवेज की सभी बसें वर्कशॉप में खड़ी रहीं। कुछ प्राइवेट बसें व वाहन  बस स्टैंड के बाहर से सवारियां उठाते रहे। बुधवार कोे बस सेवा सामान्‍य होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।

मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 को रद कराने की मांग और 700 बसें किराये पर लेकर चलाने के विरोध में यह हड़ताल की गई। सर्व कर्मचारी संघ ने रोडवेज कर्मचारियों के चक्का जाम का समर्थन किया। साथ ही हाई कोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग को लेकर 9 अगस्त को सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालने और 20 अगस्त को विधानसभा कूच करने की घोषणा की है।

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 कर्मचारियों की आपत्ति सरकार द्वारा 700 प्राइवेट बसों को लेकर किलोमीटर स्‍कीम के तहत चलाने पर है। कर्मचारी नेताआें का कहना है कि रोडवेज बस लगभग 27 रुपये प्रति किलोमीटर की आय अर्जित कर रही है, जबकि सरकार जिन बसों को किराये पर लेने जा रही है उन्हें 42 रुपये प्रति किलोमीटर तक भुगतान करेगी। यह बड़ी गड़बड़ी है। रोडवेज 42 श्रेणी के लोगों को मुफ्त यात्रा करवा रही है। मुफ्त यात्रा का पैसा रोडवेज को दे दिया जाए, फिर बेशक सरकार खूब वाहवाही लूट सकती है। रोडवेज तुरंत घाटे से उबर जाएगी।

संघर्ष समिति के नेता इंद्र सिंह बधाना, सरबत सिंह पूनिया, वीरेंद्र सिंह धनखड़ व पहल सिंह तवर का कहना है कि केंद्र सरकार नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू कर सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण करना चाहती है। इस एक्ट के लागू होने से आम जनता से किफायती व सुरक्षित सरकारी परिवहन सेवाएं छिन जाएंगी।

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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इस बिल में वाहन चालकों पर सजा व दंड को बढ़ाकर कई गुणा कर दिया गया है। सरकार इस बिल के पास होने से पहले ही इसे लागू करने पर उतावली हो रही है। इसी उतावलेपन के तहत 700 बसों को ठेके पर लेने का फैसला किया गया है, जबकि पूरे प्रदेश में निजी नहीं बल्कि सरकारी बसों की मांग की जा रही है।

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उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने के लिए विधानसभा में कानून बनाने व कच्चे कर्मचारियों को शीघ्र पक्का करने के साथ ही 2016 में लगे चालकों व परिचालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने की भी मांग की है। संघ के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि सभी विभागों के कर्मचारी 7 अगस्त की सुबह चार बजे से ही सामान्य बस अड्डों पर पहुंचकर चक्का जाम में शामिल होंगे।

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Posted By: Sunil Kumar Jha