सड़क हादसे में दिव्यांग हुए जयपाल को मिलेगा 13 लाख से अधिक का मुआवजा, बीमा कंपनी की अपील हाई कोर्ट से खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 27 साल पुराने सड़क हादसे में 100% दिव्यांग हुए जयपाल का मुआवजा 5 लाख से बढ़ाकर 13.85 लाख रुपये कर दिया है।
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25 साल की उम्र में 100 प्रतिशत दिव्यांग हुए जयपाल को अब मिलेगा 13.85 लाख रुपये मुआवजा।
HighLights
हाई कोर्ट ने दिव्यांग जयपाल का मुआवजा बढ़ाया
5 लाख से बढ़कर 13.85 लाख रुपये हुआ मुआवजा
बीमा कंपनी को 7.5% ब्याज सहित भुगतान का आदेश
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। करीब 27 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गंभीर रूप से दिव्यांग हुए पीड़ित के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुआवजे की राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 13.85 लाख रुपये कर दी है।
हादसे में 25 वर्षीय जयपाल को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी थी और वह 100 प्रतिशत दिव्यांग होकर पैराप्लेजिक हो गया था। हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की मुआवजा देयता से बचने की अपील खारिज करते हुए बढ़ी हुई राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है।
जस्टिस परमोध गोयल ने एक साथ सात अपीलों का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला 16 दिसंबर 1999 को धारूहेड़ा से भिवानी जा रहे तीन पहिया वाहन और डंपर नंबर एचआर-47-4937 के बीच हुई भीषण टक्कर से जुड़ा है। दुर्घटना में राज गिरी यादव, नरेश कुमार, राम प्रताप और शिव नारायण की मौत हो गई थी, जबकि जयपाल और आलोक घायल हुए थे।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रेवाड़ी ने हादसे के लिए डंपर चालक जाकिर हुसैन की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए जयपाल को 5 लाख रुपये मुआवजा दिया था। बीमा कंपनी ने चालक के लाइसेंस को लेकर अपनी देयता से बचने का प्रयास किया, लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था। उलटे बीमा कंपनी के अपने सर्वेयर की रिपोर्ट में लाइसेंस वैध पाया गया था।
जयपाल ने बताया था कि हादसे के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी का आपरेशन हुआ और वह चलने-फिरने तथा शारीरिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गया। मेडिकल बोर्ड ने उसे 100 प्रतिशत दिव्यांग प्रमाणित किया था। हाई कोर्ट ने माना कि पैराप्लेजिक होने के कारण उसे जीवन भर सहायक की आवश्यकता रहेगी। इसी आधार पर सहायक के खर्च का मुआवजा 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 2.52 लाख रुपये कर दिया गया।
कोर्ट ने उपचार के दौरान आय के नुकसान, चिकित्सा खर्च, विशेष आहार, परिवहन, दर्द एवं पीड़ा, भविष्य की संभावनाओं और जीवन की सुविधाओं तथा भविष्य के चिकित्सा खर्च को भी ध्यान में रखा। पुनर्गणना के बाद कुल मुआवजा 13.85 लाख रुपये तय किया गया, जो अधिकरण द्वारा दिए गए 5 लाख रुपये से 8.85 लाख रुपये अधिक है।
हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की सभी संबंधित अपीलें खारिज कर दीं और जयपाल की मुआवजा बढ़ाने वाली अपील मंजूर कर ली। बढ़ी हुई राशि पर दावा याचिका दायर करने की तारीख 2002 से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है।
