फैक्टरी में आग से श्रमिकों की मौत गैर इरादतन हत्या नहीं, रेवाड़ी के धारूहेड़ा में हुई घटना पर हाईकोर्ट का फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रेवाड़ी की धारूहेड़ा फैक्टरी आग मामले में गैर इरादतन हत्या और हत्या के प्रयास की ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला।
HighLights
हाईकोर्ट ने गंभीर धाराओं में तय आरोप किए रद।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद रिपोर्ट खारिज नहीं कर सकते।
लापरवाही की धाराओं में कार्रवाई जारी रखने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा स्थित एक फैक्टरी में आग लगने से कई श्रमिकों की मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या और हत्या के प्रयास की धाराएं हटाने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में आरोप तय करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की विशेषज्ञ रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उन्हें औपचारिक रूप से साक्ष्य के तौर पर प्रमाणित नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा कि आरोप तय करने और मुकदमे की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों को परखने के कानूनी मानक अलग-अलग हैं। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्थापित नहीं होता कि आरोपितों को अपने कृत्य से किसी की मृत्यु होने की संभावना का आवश्यक ज्ञान था। हालांकि, अदालत ने लापरवाही से संबंधित धाराओं में कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया।
16 मार्च 2024 लगी थी भीषण आग
मामला रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा स्थित लाइफ लाॅन्ग इंडिया फैक्टरी का है। यहां 16 मार्च 2024 को भीषण आग लगने से कई श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। बाद में इनमें से कई की मौत हो गई। घायल शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि फैक्टरी के धूल संग्रहण उपकरण में विस्फोट हुआ था।
उपकरण के रखरखाव में लापरवाही बरती गई और आपातकालीन निकास द्वार भी बंद रखा गया था। पुलिस जांच में दावा किया गया कि संबंधित उपकरण पहले भी दो बार फट चुका था। इसके बावजूद आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई।
आरोप तय होने पर होईकोर्ट में दी थी चुनौती
छह मार्च 2026 को रेवाड़ी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में आरोप तय कर दिए थे। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2024 में घटनास्थल का निरीक्षण करने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की विशेषज्ञ टीम को गंभीर लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला था।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर टीम ने संभावना जताई कि आग पॉलिश करने वाली मशीन के पास चिंगारी निकलने से शुरू हुई। चिंगारी ने वहां जमा ज्वलनशील बारीक धूल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आग का गोला बना और धूल छानने वाले उपकरण में विस्फोट हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों से लापरवाही का मामला बन सकता है, लेकिन केवल लापरवाही के आधार पर गैर इरादतन हत्या का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित मानसिक तत्व का प्रथम दृष्टया आधार होना आवश्यक है।
