यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 09, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हरियाणा में आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को हाई कोर्ट में चुनौती
हरियाणा में आर्थिक आरक्षण को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस संबंध में दायर याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की सन 2013 की नोटिफिकेशन के तहत आर्थिक आधार पर सामान्य श्रेणी में 10 फीसद आरक्षण का प्रावधान रद करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याची से बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने का कानूनी अधिकार पूछा तो याची ने हाईकोर्ट से शपथ पत्र देने की अनुमति मांगी। याची की मांग को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 26 अप्रैल तय की है।
याचिका झज्जर निवासी सुरेश चंद्र की तरफ से एडवोकेट संजीव कोदान ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण के कारण प्रदेश में कुल आरक्षण 67 फीसद हो गया है। इंदिरा साहनी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बतौर नजीर पेश करते हुए कहा गया कि आरक्षण 50 फीसद से अधिक नहीं हो सकता है।
इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में और तय मानकों का अनुसरण करने के बाद ही आरक्षण 50 फीसद से अधिक हो सकता है। हरियाणा सरकार के एक्ट के माध्यम से 57 फीसद का आरक्षण दिया गया है, जबकि 2013 की नोटिफिकेशन के माध्यम से आर्थिक पिछड़ा वर्ग को 10 फीसद का आरक्षण दिया गया है।
याची ने कहा कि उनकी मुख्य दलील आरक्षण 50 फीसद से ज्यादा होने की और आर्थिक आधार पर आरक्षण का संविधान में प्रावधान न होने की है। संविधान के अनुसार आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन हो सकता है, आर्थिक नहीं।
