हरियाणा में घर खरीदारों को राहत, कब्जा लेने के बाद भी बिल्डर से मांग सकेंगे देरी का मुआवजा; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि फ्लैट का कब्जा लेने या बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर करने के बाद भी ...और पढ़ें

हरियाणा में घर खरीदारों को राहत। फोटो एआई की मदद से बनाई गई है
HighLights
कब्जा लेने के बाद भी खरीदार मुआवजे का हकदार।
बिल्डर की देरी की जिम्मेदारी समझौते से खत्म नहीं होती।
शिकायत तीन वर्ष के भीतर करना उचित माना जाएगा।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने घर खरीदारों के हित में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि फ्लैट का कब्जा लेने या बिक्री विलेख (कन्वेयंस डीड) पर हस्ताक्षर करने मात्र से बिल्डर से देरी के लिए ब्याज या मुआवजा मांगने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं होता।
अदालत ने कहा कि रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम के तहत तय समय पर कब्जा नहीं देने पर बिल्डर की जिम्मेदारी अनिवार्य है। केवल किसी करार की शर्त या कब्जा स्वीकार कर लेने के आधार पर इस जिम्मेदारी से बिल्डर को मुक्त नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह फैसला गुरुग्राम के सेक्टर-102 स्थित एमार गुरुग्राम ग्रीन्स परियोजना से जुड़े 47 मामलों में सुनाया। अप्रैल 2013 के खरीदार समझौते के अनुसार 16 नवंबर 2016 तक कब्जा दिया जाना था, लेकिन परियोजना को मई 2019 में अधिभोग प्रमाणपत्र मिला और दिसंबर 2019 में कब्जा सौंपा गया।
बिक्री विलेख फरवरी 2020 में हुआ। खरीदार ने सितंबर 2022 में हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण में शिकायत की, जहां उसे देरी के लिए 11 प्रतिशत ब्याज दिया गया था।
आपसी समझौते का कोई प्रावधान नहीं
बिल्डर एमार इंडिया ने तर्क दिया था कि खरीदारों ने फ्लैट का कब्जा लेने और बिक्री विलेख निष्पादित करने के बाद देरी से कब्जे के ब्याज का दावा करने का अधिकार खो दिया है। हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बिल्डर की देनदारी को समाप्त या कम करने के लिए आपसी समझौते का कोई प्रावधान नहीं है।
इसलिए कब्जा लेने के बाद भी खरीदार अपने वैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि देरी का दायित्व कब्जा सौंपे जाने के समय तय हो जाता है। हालांकि हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि खरीदार किसी भी समय शिकायत कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गणना से बाहर रखा जाएगा
चूंकि रियल एस्टेट कानून में ऐसी शिकायत के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है, इसलिए सामान्य तौर पर कब्जा मिलने के तीन वर्ष के भीतर शिकायत करना उचित अवधि माना जाएगा। इसमें 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 तक की कोविड अवधि को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गणना से बाहर रखा जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में बिल्डर ने 40 लाख रुपये से अधिक की देनदारी के दावे के मुकाबले केवल पांच-छह लाख रुपये का भुगतान किया था। केवल इतना भुगतान कर देने से वैधानिक देनदारी खत्म नहीं हो जाती, जब तक खरीदार ने स्पष्ट रूप से लिखित रूप में पूर्ण और अंतिम समझौता न किया हो।
