'कागजों पर MSP, मंडियों में किसान को नहीं मिल रहा भाव...', रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर बोला हमला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ न देने का आरोप लगाया है।

कागजों पर एमएसपी, मंडियों में किसान को नहीं मिल रहा भाव: सुरजेवाला
HighLights
सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर एमएसपी न देने का आरोप लगाया।
मंडियों में धान और बाजरे का भाव एमएसपी से काफी कम।
किसानों को प्रति एकड़ 12000 रुपये तक का नुकसान हो रहा।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ नहीं दिलाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणाओं और मंडियों की वास्तविक स्थिति में अंतर है। हालांकि सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2441 रुपये और ए-ग्रेड धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल है।
सुरजेवाला ने दावा किया कि इंद्री, तरावड़ी, नीलोखेड़ी और असंध जैसी मंडियों में मोटा धान करीब 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। पूसा 1509 और पूसा 1692 का भाव महीने की शुरुआत में 4200 रुपये तक था, जो अब 3500 रुपये तक आ गया है।
उनके अनुसार इससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 12000 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। किसान संगठन 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि निर्धारित खरीद तिथि एक अक्टूबर है।
बाजरे को लेकर सुरजेवाला ने कहा कि 2900 रुपये एमएसपी के मुकाबले मंडियों में करीब 2000 रुपये भाव मिलने से किसानों को 900 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से सरकारी खरीद शुरू करने अथवा भावांतर के जरिये इस अंतर की भरपाई करने की मांग की।
सुरजेवाला ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में करीब 24 लाख एकड़ धान के पंजीकरण में से 4.63 लाख एकड़ का मिलान लंबित होने का दावा किया है। साथ ही कहा कि कुल 1458 राइस मिलर्स में से केवल 280 ने पंजीकरण कराया है। सुरजेवाला ने सरकार से लंबित सत्यापन जल्द पूरा करने और मिलर्स के साथ गतिरोध दूर कर खरीद-उठान व्यवस्था सुचारू करने की मांग की।
