राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। Haryana Weather News: हरियाणा में रविवार को दिनभर रुक-रुक कर हुई बारिश से मौसम गुलाबी हो गया। 23 सितंबर से दिन छोटे और रातें बड़ी होने के साथ ही उम्मीद का जा रही थी कि ठंड जल्द दस्तक देगी, लेकिन ऐसा रविवार को हुई बारिश के बाद ही अहसास हुआ। प्रदेश में इस दिन 21.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जिसने पिछले 11 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। इस दिन कई स्थानों पर ओले भी पड़े हैं। 2014 में अक्टूबर के महीने में सबसे अधिक 10.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 2010 के बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब अक्टूबर के महीने में इतनी अधिक बारिश हुई है।

इस बारिश के साथ ही गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है, लेकिन मंडियों में खुले में पड़ी धान की फसल को इस बेमौसमी बरसात ने खराब कर दिया है। खेत हालांकि खाली हो चुके हैं, लेकिन किसानों का धान मंडियों और घेर में पड़ा है। राज्य में 15 नवंबर तक धान की खरीद होगी। इस बार राज्य में धान की खरीद देरी से शुरू हुई है, जिस कारण खेत जल्दी खाली नहीं हो सके। इसलिए रविवार की बारिश ने जहां तापमान में गिरावट ला दी है, वहीं किसानों के चेहरे पर मायूसी आ गई है।

प्रदेश में 24 अक्टूबर को अधिकतम औसत तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आठ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चली। पंजाब में इस दिन 29.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो हरियाणा से ज्यादा है। चंडीगढ़ में 11.7 मिलीमीटर बारिश ने मौसम में ठंडक का अहसास करा दिया है। राज्य में 2011, 2017 और 2020 में अक्टूबर के महीने में बरसात की एक बूंद भी नहीं गिरी। इन तीनों साल में अक्टूबर का पूरा महीना सूखा रहा। 2013 में 9.9 एमएम, 2016 में 5.3 एमएम और 2019 में 5.1 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है।

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार एक जनवरी 2022 को हरियाणा का मौसम काफी ठंडा रहने की उम्मीद है। इस दिन तापमान सात डिग्री सेल्सियस से 19 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। आप यदि जनवरी के महीने में कहीं घूमने का प्रोग्राम बना रहे हैं तो जान लें कि हरियाणा में तीन से आठ दिनों की बारिश संभव है। ऐसे में अपनी छतरी साथ रखना एक अच्छा विकल्प है ताकि आप खराब मौसम में न फंस जाएं।

किसानों को तुरंत मुआवजा दे सरकार : हुड्डा

वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के अधिकतर हिस्सों में बेमौसमी बरसात व ओलावृष्टि ने भारी नुकसान किया है। सरकार को तुरंत स्पेशल गिरदावरी करानी चाहिए और 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देना चाहिए। धान, कपास व गन्ने की खड़ी फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हुआ है। अभी तक सरकार ने कुछ दिन पहले हुए नुकसान की गिरदावरी रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की और न ही पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया है।

Edited By: Kamlesh Bhatt