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हरियाणा में PGT भर्ती व प्रमोशन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, एचटेट/एसटेट पास करना ही होगा; चुनौती वाली याचिकाएं खारिज

Published: Mon, 19 Oct 2026 03:42 PM (IST)

हरियाणा में स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) के पद पर नियुक्ति और पदोन्नति के लिए हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) या स्कूल शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटेट) उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा।

पीजीटी भर्ती और पदोन्नति में एचटेट अनिवार्य। फाइल फोटो

पीजीटी भर्ती और पदोन्नति में एचटेट अनिवार्य। फाइल फोटो

HighLights

  1. पीजीटी नियुक्ति और पदोन्नति के लिए एचटेट/एसटेट अब अनिवार्य

  2. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं

  3. राज्य सरकार शिक्षा गुणवत्ता हेतु अतिरिक्त योग्यता तय कर सकती है

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। हरियाणा में स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) के पद पर नियुक्ति और पदोन्नति के लिए हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) या स्कूल शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटेट) उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।

अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की ओर से तय योग्यताएं न्यूनतम मानक हैं और राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त योग्यता निर्धारित कर सकती है।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने कहा कि पीजीटी पद के लिए एचटेट/एसटेट की अनिवार्यता को मनमाना, अवैध या अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता।

हरियाणा राज्य शिक्षा विद्यालय संवर्ग (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 2012 के तहत पीजीटी नियुक्ति के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि एनसीटीई की 12 नवंबर, 2014 की अधिसूचना में कक्षा 11वीं और 12वीं के शिक्षकों के लिए एचटेट/एसटेट अनिवार्य नहीं है। उनके अनुसार, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त योग्यता तय करना केंद्रीय प्रावधानों के विपरीत है।

हाई कोर्ट ने कहा कि पीजीटी शिक्षक केवल 11वीं और 12वीं कक्षाओं को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाते हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा जरूरी है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें निर्धारित कक्षाओं में अध्यापन के लिए इस परीक्षा को अनिवार्य योग्यता माना गया था। ऐसे में पीजीटी शिक्षकों के लिए यह शर्त अनुचित नहीं है।

खंडपीठ ने बताया कि 2012 के सेवा नियमों के तहत पीजीटी के 67 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते हैं। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) से पीजीटी पद पर पदोन्नति के लिए भी एचटेट/एसटेट जरूरी है। सीधी भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए यह योग्यता अनिवार्य न करने से दोनों श्रेणियों के बीच असमानता हो सकती थी।

अदालत ने कहा कि एनसीटीई के न्यूनतम मानकों से अधिक योग्यता तय करना अपने आप में अवैध नहीं है। राज्य सरकार शिक्षकों की गुणवत्ता और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अतिरिक्त पात्रता निर्धारित कर सकती है। इन आधारों पर हाई कोर्ट ने याचिकाओं में हस्तक्षेप का कारण नहीं पाया और उन्हें खारिज कर दिया।