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हरियाणा के 26 साल पुराने हत्याकांड में उम्रकैद बरकरार, 5 दोषियों को नहीं मिलेगी मौत की सजा; हाई कोर्ट का फैसला

Published: Fri, 25 Sep 2026 12:02 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने नारायणगढ़ हत्याकांड में पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 26 साल पुराने नारायणगढ़ हत्याकांड में हाई कोर्ट का फैसला

  2. पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई

  3. मृत्युदंड की मांग और दोषियों की अपील खारिज

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। नारायणगढ़ में करीब 26 वर्ष पहले युवक संजीव कुमार की चाकू से हमला कर हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पांच दोषियों को बड़ी राहत देने से इन्कार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।

हालांकि, अदालत ने मृतक के स्वजन की ओर से दायर वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें दोषियों की उम्रकैद को मृत्युदंड में बदलने की मांग की गई थी।

जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस मनदीप पन्नू की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता।

26 साल पुराना है मामला

मामला 16 सितंबर 2000 का है। अभियोजन के अनुसार संजीव कुमार नारायणगढ़ में खेल देखने के बाद अपने गांव लौट रहा था। हुसैनी रोड पार करते समय उसने देखा कि पांच युवक उसके साथ मारपीट कर रहे थे। गंभीर रूप से घायल संजीव को पहले नारायणगढ़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया और वहां से पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर किया गया। पीजीआइ में रात करीब 7:45 बजे उसकी मौत हो गई।

इस मामले में सुखदेव सिंह, राजपाल, अनिल चौहान, हरीश कुमार उर्फ रिक्कू और प्रदीप कुमार को दोषी ठहराया गया था। अंबाला की अतिरिक्त सत्र अदालत ने वर्ष 2004 में पांचों को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

दोषियों की ओर से हाई कोर्ट में तर्क दिया गया कि प्राथमिकी में कुछ आरोपितों के नाम अलग थे और बाद में दो अन्य नाम सामने आए। साथ ही चश्मदीदों के बयानों में भी हमलावरों की भूमिकाओं को लेकर अंतर था।

मौके से केवल एक चाकू मिला

दोषियों ने यह भी दलील दी कि अभियोजन ने कई चाकुओं के इस्तेमाल का आरोप लगाया, लेकिन बरामद केवल एक चाकू हुआ।

हाई कोर्ट ने कहा कि हथियार की बरामदगी हत्या का आरोप साबित करने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को चिकित्सकीय साक्ष्य का भी समर्थन मिला। संजीव के शरीर पर धारदार हथियार से लगी कई गंभीर चोटें मिली थीं।

मृतक के स्वजन ने दोषियों की सजा बढ़ाकर मृत्युदंड करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने कहा कि मृतक का युवा होना और घटना में उसकी मौत होना अपने आप में मृत्युदंड देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि वारदात वर्ष 2000 की है और मामला लंबे समय से लंबित रहा। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा बढ़ाने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील और सजा बढ़ाने की याचिका दोनों खारिज कर दीं। पांचों दोषी फिलहाल जमानत पर थे। अदालत ने संबंधित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को उनकी दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर शेष सजा भुगतने के निर्देश दिए हैं।