रोहतक रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर हाई कोर्ट सख्त:, न्यायिक अधिकारियों को जमानत याचिका सुनने से रोका
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रोहतक में 11.69 करोड़ रुपये के रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में सख्त रुख अपनाया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने रोहतक रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर सख्त रुख अपनाया
रोहतक के न्यायिक अधिकारी अब जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेंगे
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी 11.69 करोड़ रुपये धोखाधड़ी की जांच करेंगे
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। रोहतक में घर खरीदने वालों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
हाई कोर्ट ने मामले में रोहतक सत्र मंडल में तैनात न्यायिक अधिकारियों को आगे किसी भी आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से रोक दिया है। जस्टिस एनएस शेखावत ने यह आदेश उस समय दिया जब अदालत के सामने यह तथ्य आया कि मामले में कुछ आरोपितों को ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि अन्य आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर अलग रुख अपनाया गया।
अदालत ने मामले की जांच को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला डीएचएल इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और गुप्ता प्रापर्टी डेवलपर्स से जुड़ा है।
आरोप है कि इन कंपनियों ने रोहतक के सेक्टर-27ए स्थित आवासीय प्रोजेक्ट 'डीएचएल न्यू टाउन' में मकान दिलाने के नाम पर लोगों से निवेश कराया। खरीदारों को परियोजना की मंजूरी, समय पर कब्जा और बिक्री विलेख कराने के संबंध में कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो उन्हें आवास का कब्जा दिया गया और न ही बिक्री विलेख कराया गया। प्रारंभिक जांच में कम से कम 30 खरीददारों से 11.69 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की बात सामने आई है।
अदालत ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियां अक्सर आम लोगों को समय पर घर देने का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये जुटाती हैं, लेकिन बाद में न तो उन्हें मकान मिलता है और न ही निवेश की राशि वापस की जाती है।
लोगों की जीवनभर की कमाई दांव पर लग जाती है: हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में धोखाधड़ी केवल व्यक्तिगत या अनुबंध संबंधी विवाद नहीं होती, बल्कि कई बार यह बड़ी साजिश का हिस्सा होती है, जिसमें लोगों की जीवनभर की कमाई दांव पर लग जाती है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले के जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि वह आरोपितों की मदद करने का प्रयास कर रहा है।
हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत के पहले के आदेशों के बावजूद जांच उचित तरीके से नहीं की गई। एफआइआर दर्ज होने के चार महीने बाद भी रियल एस्टेट प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर अदालत ने रोहतक पुलिस के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी करेगा जांच
हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी की नियुक्ति की जाए। अधिकारी को जांच की प्रगति की स्थिति रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अदालत में दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
