हरियाणा में एसीपी लाभ में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग से मांगा पूरा हिसाब
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में शिक्षकों और कर्मचारियों को सुनिश्चित कैरियर प्रगति (एसीपी) लाभ देने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
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हरियाणा में एसीपी लाभ में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग से मांगा पूरा हिसाब (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने एसीपी लाभ में देरी पर कड़ा रुख अपनाया
शिक्षा विभाग से लंबित मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया
निर्देशों के पालन में चूक पर 50 हजार हर्जाने की चेतावनी
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को सुनिश्चित कैरियर प्रगति (एसीपी) का लाभ देने में हो रही देरी पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में एसीपी लाभ के लंबित मामलों पर राज्य सरकार के जवाब को टालमटोल वाला और असंतोषजनक बताते हुए व्यापक जानकारी तलब की है।
अदालत ने हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वह शिक्षा विभाग के तीनों निदेशालयों में लंबित मामलों का पूरा ब्योरा जुटाएं और प्रत्येक मामले में देरी का कारण बताएं।
अदालत ने चेतावनी दी है कि निर्देशों के अनुपालन को दर्शाने वाला उचित हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो याचिकाकर्ता को 50 हजार रुपये का हर्जाना दिया जाएगा, जिसकी वसूली अनुपालन में चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी से होगी।
यह मामला हरियाणा की शिक्षिका स्वाति देवी की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति 17 दिसंबर 2008 को टीजीटी गृह विज्ञान के पद पर हुई थी। उन्हें एक जनवरी 2017 से पहला एसीपी लाभ दिया गया था। इसके बाद 16 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी होने पर वह एक जनवरी 2025 से दूसरे एसीपी लाभ की हकदार हो गई थीं।
हालांकि, विभाग ने दूसरे एसीपी को मंजूरी देने में करीब 16 महीने लगा दिए। पांच मई 2026 को लाभ मंजूर करते हुए संबंधित अधिकारियों को वेतन निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आर्थिक लाभ जारी नहीं किए गए। शिक्षिका ने 22 जून और दो जुलाई 2026 को भी विभाग को पत्र लिखकर अपनी मांग उठाई थी।
हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए प्रारंभिक आदेश में कहा था कि 13 सितंबर 2023 के सरकारी निर्देशों के अनुसार एसीपी लाभ मंजूर होने के बाद एक महीने के भीतर संबंधित आर्थिक लाभ जारी किए जाने चाहिए। इसके बावजूद भुगतान लंबित रहने पर अदालत ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर देरी का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का हलफनामा अदालत में पेश किया गया। हालांकि, जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने राज्य सरकार के जवाब को असंतोषजनक मानते हुए शिक्षा विभाग के लंबित मामलों का व्यापक विवरण तैयार करने का निर्देश दिया।
अदालत ने प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा निदेशालयों में एसीपी लाभ से जुड़े सभी लंबित दावों, उनकी पात्रता अथवा मंजूरी की तारीख और देरी के कारणों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।
