'साक्षात्कार के न्यूनतम अंक न होने पर उम्मीदवार अयोग्य नहीं', भर्ती प्रक्रिया में पंजाब-हरियाणा HC का अहम फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती विज्ञापन में साक्षात्कार के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
HighLights
साक्षात्कार के न्यूनतम अंक न होने पर अयोग्य नहीं
चयन समिति को विज्ञापन के सभी मानकों पर आकलन करना होगा
भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलना गलत: हाई कोर्ट
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती विज्ञापन में बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार के लिए न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित नहीं किए गए हैं, तो चयन समिति केवल साक्षात्कार के आधार पर किसी उम्मीदवार को ‘योग्य नहीं पाया गया’ घोषित नहीं कर सकती।
चयन समिति को विज्ञापन में निर्धारित सभी मानकों और उनके लिए तय अंकों के आधार पर उम्मीदवार की योग्यता का आकलन करना होगा।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी में सहायक पद की भर्ती से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चयन के दौरान ऐसा अयोग्यता मानदंड लागू करना, जो भर्ती विज्ञापन में था ही नहीं, अधिकार क्षेत्र से परे जाकर चयन प्रक्रिया के नियमों को बदलने के समान है।
विज्ञापने में कुल 100 अंकों की चयन प्रक्रिया निर्धारित
मामला सहायक के आठ पदों की भर्ती का था। इनमें एक पद बीसी-बी श्रेणी के लिए आरक्षित था। याचिकाकर्ता ने इस पद के लिए आवेदन किया था। विज्ञापन में कुल 100 अंकों की चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।
इसमें कंप्यूटर टाइपिंग के 35, सामान्य योग्यता परीक्षा के 30, शैक्षणिक योग्यता के 10, कार्य अनुभव के पांच, विषय ज्ञान के आठ और साक्षात्कार के 12 अंक निर्धारित थे।पहले चार मानकों के आधार पर मेरिट तैयार कर उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था।
याचिकाकर्ता के पास दस साल का अनुभव
याचिकाकर्ता स्नातक था और उसके पास आवश्यक पांच वर्ष के मुकाबले 10 वर्ष का कार्य अनुभव था। उसने पहले चार मानकों में 35.55 अंक हासिल किए और बीसी-बी श्रेणी में खुद को सबसे अधिक मेरिट वाला उम्मीदवार बताया। हालांकि याचिकाकर्ता को विषय ज्ञान और साक्षात्कार दोनों में शून्य अंक दिए गए और उसे ‘योग्य नहीं पाया गया’।
खास बात यह रही कि किसी भी उम्मीदवारों में से किसी की सिफारिश नहीं की गई और पद खाली रह गया।हाई कोर्ट ने कहा कि यह चयन प्रक्रिया न तो पूरी तरह और न ही मुख्य रूप से साक्षात्कार पर आधारित थी।
कुल 100 में 80 अंक पहले चार मानकों के लिए थे, जबकि विषय ज्ञान और साक्षात्कार के लिए संयुक्त रूप से केवल 20 अंक निर्धारित थे। विज्ञापन में इन दोनों चरणों में न्यूनतम अंक हासिल करने की कोई शर्त नहीं थी।
कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भर्ती प्राधिकरण विज्ञापन में घोषित मानदंडों से अलग नहीं जा सकता। ऐसा करना चयन प्रक्रिया के बीच में ‘खेल के नियम बदलने’ के समान होगा।
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय को दिया निर्देश
याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की सहायक पद पर नियुक्ति के लिए कोर्ट की टिप्पणियों के अनुरूप छह सप्ताह के भीतर उचित निर्णय ले। यदि उसे नियुक्त किया जाता है तो अन्य चयनित उम्मीदवारों के कार्यभार संभालने की तारीख से उसे सांकेतिक लाभ मिलेगा, लेकिन वेतन वास्तविक कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से ही देय होगा।
