'सड़क हादसे में लापरवाही साबित न होने पर भी मिलेगा मुआवजा', 26 साल पुराने मामले में पंजाब-हरियाणा HC का अहम फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 26 साल पुराने सड़क हादसे में मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
हाईकोर्ट ने 26 साल पुराने हादसे में मुआवजा दिया
चालक की लापरवाही साबित न होने पर भी मुआवजा
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164 के तहत राहत
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सड़क हादसे में चालक की लापरवाही साबित नहीं होने पर भी पीड़ित परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने करीब 26 साल पुराने मामले में मृतक मुन्ना के परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि मोटर वाहन के इस्तेमाल से हादसा होने और उसमें किसी व्यक्ति की मौत साबित होने पर बिना गलती के मुआवजे के प्रावधान के तहत राहत दी जा सकती है। मुआवजे पर याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
26 साल पुराना है मामला
मामला 25 अप्रैल 2000 का है। मुन्ना पलवल से साइकिल पर आ रहा था, तभी एक कार ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल मुन्ना को पहले नागरिक अस्पताल, पलवल ले जाया गया। बाद में उसे सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
हादसे के बाद कार चालक के खिलाफ पलवल थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। मुन्ना की पत्नी, बेटे और मां ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, फरीदाबाद में मुआवजे की मांग की। अधिकरण ने 16 नवंबर 2002 को दावा खारिज कर दिया था। उसका कहना था कि चालक की लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए गए।
परिजनों ने अधिकरण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस परमोद गोयल ने सुनवाई में कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों में साक्ष्य का मानक आपराधिक मुकदमों जितना कठोर नहीं होता। तथ्यों का आकलन संभावनाओं के आधार पर किया जाता है।
हादसे के दिन हुई थी एफआईआर दर्ज
अदालत ने पाया कि हादसे के दिन ही प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिसकर्मी ने प्राथमिकी और मृत्यु संबंधी दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखे थे। इनसे साबित हुआ कि हादसे में संबंधित कार शामिल थी और मुन्ना की मौत दुर्घटना में लगी चोटों के कारण हुई। अदालत ने परिस्थितियों से निष्कर्ष निकालने के सिद्धांत का भी सहारा लिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164 के तहत निर्धारित मुआवजे का लाभ एक अप्रैल 2022 से पहले हुए हादसों के मामलों में भी दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह संशोधन प्रक्रियात्मक प्रकृति का है और इसका लाभ पुराने मामलों में भी मिल सकता है।
अदालत ने परिवार की याचिका को धारा 164 के तहत मानते हुए पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इस राशि पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज देय होगा। भुगतान की प्राथमिक जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली।
