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हरियाणा में 26 साल पुराने हत्या मामले में हाई कोर्ट ने दी राहत, उम्रकैद की सजा को 7 साल की कैद में बदला

Published: Wed, 09 Sep 2026 02:53 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने हत्या के मामले में दो आरोपितों की उम्रकैद की सजा को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया है।

26 साल पुराने हत्या मामले में हाई कोर्ट का अहम फैसला, उम्रकैद की सजा सात साल में बदली।

26 साल पुराने हत्या मामले में हाई कोर्ट का अहम फैसला, उम्रकैद की सजा सात साल में बदली।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को सात साल में बदला

  2. मामला 26 साल पुराना, गैर इरादतन हत्या करार दिया

  3. अचानक हुए झगड़े के कारण हुई थी घटना

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने करीब 26 साल पुराने हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपितों की उम्रकैद की सजा को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया है। अदालत ने माना कि घटना पूर्व नियोजित हमला नहीं, बल्कि अचानक हुए झगड़े और गुस्से में हुई मारपीट का परिणाम थी।

हाई कोर्ट ने बलवान सिंह और बस्ती राम को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो के तहत सात-सात साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

मामला रेवाड़ी के कोसली थाना क्षेत्र का है। 21 मई 2000 को साझा कुएं और बिजली की मोटर को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। अभियोजन के अनुसार, करीब 70 वर्षीय मूलचंद ने बलवान सिंह के सामने मोटर को नुकसान पहुंचाने को लेकर नाराजगी जताई।

इसके बाद बलवान सिंह घर के अंदर गया और कुल्हाड़ी लेकर लौटा। उसके साथ बस्ती राम भी हथियार लेकर आया। मूलचंद को कथित तौर पर बाहर खींचकर ले जाया गया और उसके सिर पर कुल्हाड़ी के पिछले हिस्से से वार किया गया। बस्ती राम पर जेली से उसकी जांघ पर वार करने का आरोप था। सिर की चोट बाद में मूलचंद की मौत का कारण बनी।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि घटना के दौरान आरोपित पक्ष के लोग भी घायल हुए थे। अदालत ने कहा कि अभियोजन इन चोटों का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। चिकित्सा साक्ष्य के अनुसार मूलचंद के सिर की चोट को छोड़कर अन्य चोटें साधारण प्रकृति की थीं।

बलवान सिंह, दिनेश और बस्ती राम को भी चोटें लगी थीं। परिस्थितियों के आधार पर हाई कोर्ट ने माना कि घटना साझा रास्ते में हुई होने की संभावना अधिक है और घर में घुसकर हमला करने की बात संदेह से परे साबित नहीं हुई। अदालत ने माना कि बलवान और बस्ती राम द्वारा मूलचंद को चोटें पहुंचाने के समय बाकी आरोपित मौके पर बाद में पहुंचे थे।

इसलिए उनके बीच हत्या करने की साझा मंशा साबित नहीं हुई। राम अवतार, दिनेश, राजेश और राज कुमार को हत्या तथा धारा 324 के आरोप से बरी कर केवल साधारण चोट पहुंचाने की धारा 323 के तहत दोषी माना गया। उनकी छह महीने की सजा को पहले से जेल में बिताई अवधि तक सीमित कर दिया गया।

26 साल चली मुकदमेबाजी का भी असर

हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के बाद आरोपितों के खिलाफ कोई आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई और दोनों पक्ष एक ही गांव में आमने-सामने रहते हुए भी आगे कोई विवाद नहीं हुआ। अदालत ने इसे अचानक हुए झगड़े और आवेश में हुई घटना माना।

इसी आधार पर बलवान सिंह और बस्ती राम की हत्या की सजा हटाकर धारा 304 भाग-दो के तहत सात साल का कठोर कारावास सुनाया गया। बलवान सिंह को एक अन्य चोट के मामले में एक साल की सजा भी दी गई, जो सभी सजाओं के साथ-साथ चलेगी।