पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, घरेलू काम की कीमत समझी; महिला की मौत पर मुआवजा 9.80 से बढ़ाकर 22.62 लाख किया
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में मृत महिला के परिवार को बड़ी राहत दी है, मुआवजे को 9.80 लाख से बढ़ाकर 22.62 लाख रुपये किया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने मुआवजा 9.80 लाख से 22.62 लाख रुपये बढ़ाया।
मृतका के घरेलू योगदान को आय आकलन में जोड़ा गया।
बीमा कंपनी अवैध लाइसेंस वाले चालक-मालिक से वसूली करेगी।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। सड़क हादसे में पत्नी और मां को खोने वाले परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा तय 9.80 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 22.62 लाख रुपये कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक की केवल नौकरी से मिलने वाली आय को आधार बनाकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता। वह पत्नी और दो स्कूली बच्चों की मां होने के साथ परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रही थी।
इस घरेलू योगदान को भी मुआवजे के आकलन में ध्यान में रखना होगा। साथ ही कोर्ट ने बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं पाए जाने पर बीमा कंपनी को चालक और वाहन मालिक से मुआवजे की राशि वसूलने का अधिकार दे दिया।
क्या है मामला?
मामला 20 अक्टूबर 2010 का है। राकेश कुमार अपनी पत्नी मीना ठाकुर के साथ स्कूटर पर चंडीगढ़ सेक्टर-35 स्थित घर लौट रहे थे। करीब दोपहर 3:15 बजे किसान भवन चौक के पास पीछे से आई बस ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मीना ठाकुर सड़क पर गिर गईं और बस के अगले बाएं पहिये के नीचे आ गईं।
उन्हें सेक्टर-16 स्थित सरकारी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे के समय मीना ठाकुर की उम्र 35 वर्ष थी। वह पंचकूला के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थीं और नौ हजार रुपये मासिक वेतन प्राप्त कर रही थीं।
जस्टिस अमरजोत भट्टी ने राकेश कुमार व अन्य तथा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपीलों पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने मृतका की आय केवल नौ हजार रुपये मासिक मानी थी।
जबकि वह पति और 11 वर्षीय बेटी तथा नौ वर्षीय बेटे की देखभाल भी कर रही थी। हाई कोर्ट ने उसकी आय में घरेलू जिम्मेदारियों के लिए तीन हजार रुपये जोड़कर मासिक आय 12 हजार रुपये मानी।
16500 रुपये तय की गई मासिक आय
इसके बाद भविष्य की आय में 50 प्रतिशत वृद्धि जोड़ते हुए मासिक आय 16,500 रुपये तय की गई। 35 वर्ष की उम्र के आधार पर 16 का गुणक लगाकर निर्भरता की राशि 21.12 लाख रुपये तय की गई। इसके अलावा कंसोर्टियम, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के मद में राशि जोड़कर कुल मुआवजा 22.62 लाख रुपये किया गया।
बीमा कंपनी ने भी ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसका कहना था कि बस चालक पंचक नामग्याल के पास भारी यात्री वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था।
मामले की जांच के दौरान लेह के एआरटीओ की गवाही सामने आई। उन्होंने बताया कि चालक के लाइसेंस में हल्के परिवहन वाहन और सार्वजनिक सेवा वाहन के लिए अनुमोदन था, लेकिन भारी वाहन चलाने के लिए आवश्यक अनुमोदन नहीं था। कोर्ट ने इस गवाही को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने इसे सही तरीके से नहीं देखा।
12.81 लाख रुपये राशि की मंजूर
हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील भी स्वीकार कर ली। कोर्ट ने बीमा कंपनी को चालक और वाहन मालिक के खिलाफ मुआवजे की राशि की वसूली का अधिकार प्रदान किया है। इस तरह मृतक के परिवार के पक्ष में मुआवजे में करीब 12.81 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर हुई, जो अपील की तारीख से भुगतान होने तक ट्रिब्यूनल द्वारा तय ब्याज के साथ देय होगी।
