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लेक्चरर बनी तबला वादक की पत्नी की पेंशन पर 3 महीने में निर्णय ले हरियाणा सरकार, हाई कोर्ट का आदेश

Published: Sat, 19 Sep 2026 12:56 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय महिला की याचिका पर हरियाणा सरकार को तीन माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को पेंशन मामले पर निर्णय का आदेश दिया

  2. 70 वर्षीय महिला को लेक्चरर के बजाय तबला वादक वेतन पर पेंशन मिल रही

  3. कोर्ट ने तीन माह में कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी कॉलेज में लेक्चरर के पद पर कार्यरत रहे दिवंगत कर्मचारी की पत्नी को पिछले करीब 26 वर्षों से तबला वादक के वेतनमान के आधार पर पारिवारिक पेंशन मिलने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शिकायत पर समयबद्ध फैसला लेने का निर्देश दिया है।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया कि महिला के कानूनी नोटिस पर सुनवाई का अवसर देने के बाद तीन महीने के भीतर स्पष्ट और कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। यदि वह मांगी गई राहत की हकदार पाई जाती हैं तो लाभ तत्काल दिया जाए।

2000 में लेक्चरर के पद पर हुई थी मृत्यु

याचिकाकर्ता कैलाश ने हाईकोर्ट में बताया कि उनके पति हवा सिंह की नियुक्ति 20 फरवरी 1978 को राजकीय महिला महाविद्यालय, रोहतक में तबला वादक के पद पर हुई थी।

बाद में 11 जनवरी 1994 को उन्हें संगीत विषय में लेक्चरर के पद पर तदर्थ आधार पर नियुक्त किया गया। छह अक्टूबर 2000 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उस समय वह संगीत लेक्चरर के पद पर कार्यरत थे और उन्हें 8000-275-13500 रुपये के वेतनमान में 9375 रुपये मूल वेतन मिल रहा था।

याचिकाकर्ता के अनुसार इसके बावजूद उनकी पारिवारिक पेंशन की गणना लेक्चरर के बजाय तबला वादक के पद के वेतनमान के आधार पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है और लंबे समय से वह इसी आधार पर पेंशन प्राप्त कर रही हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हरियाणा सरकार ने 10 जनवरी 2018 को जारी स्पष्टता में कहा था कि एक जनवरी 1986 के बाद और एक जनवरी 2016 से पहले सेवा में मृत्यु वाले सरकारी कर्मचारी के मामले में एक जनवरी 2016 के लिए काल्पनिक वेतन निर्धारित करते समय मृत्यु के समय मिलने वाले वास्तविक वेतन और वेतनमान को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इसी आधार पर महिला ने अपनी पारिवारिक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की दोबारा गणना करने की मांग की। उन्होंने 23 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सरकार ने उठाया समय-सीमा का सवाल

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि महिला का दावा देरी से किया गया है, क्योंकि संबंधित सरकारी स्पष्टता वर्ष 2018 में जारी हुई थी। हालांकि, सरकार ने उनके कानूनी नोटिस पर सक्षम अधिकारी को समयबद्ध तरीके से फैसला लेने का निर्देश देने पर आपत्ति नहीं की।

इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया कि नोटिस पर सुनवाई कर तीन महीने में कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। आदेश की प्रति मिलने के बाद अवधि की गणना होगी और निर्णय महिला को भी बताया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वह मांगे गए लाभ की पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें राहत तुरंत प्रदान करनी होगी।