पत्नी की हत्या के आरोप में 4 साल से जेल में बंद था पति, गवाह के बयान से पलटने पर पंजाब-हरियाणा HC ने दी जमानत
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोप में लगभग चार वर्षों से जेल में बंद व्यक्ति ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो (जागरण)
HighLights
हाई कोर्ट ने पत्नी हत्या के आरोपी अमित को जमानत दी
आरोपी लगभग चार वर्षों से जेल में था, मुकदमा अधूरा
शिकायतकर्ता ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पत्नी की हत्या के आरोप में लगभग चार वर्षों से जेल में बंद व्यक्ति को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने यह माना कि मामला अभी तक पूरा नहीं हुआ है और 14 में से केवल पांच-छह अभियोजन गवाहों की गवाही हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मृतका की बहन और शिकायतकर्ता ने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपित अमित को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।
पलवल में हुआ हत्या का मामला दर्ज
अमित के खिलाफ पलवल जिले के हसनपुर थाने में 27 अगस्त 2022 को हत्या का मामला दर्ज किया गया था। उस समय भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसे अब भारतीय न्याय संहिता में संबंधित धारा 103 के रूप में प्रतिस्थापित किया गया है।
अभियोजन के अनुसार, अमित और उसकी पत्नी काजल एक ही घर में रहते थे और दोनों के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते थे। 26 अगस्त 2022 की शाम विवाद के बाद अमित कथित तौर पर काजल को मोटरसाइकिल पर लेकर निकला। परिवार को लगा कि दोनों कोकिलावन तीर्थ गए हैं।
रात करीब साढ़े दस से 11 बजे के बीच अमित अकेला घर लौटा और बताया कि काजल खेतों में बेहोश पड़ी है। परिजन मौके पर पहुंचे तो काजल मृत मिली। आरोप है कि अमित ने उसकी हत्या करने की बात स्वीकार की थी।
प्रेस वायर के दो टूटे टुकड़े बरामद हुए
पुलिस जांच में घटनास्थल से टूटी हुई कांच की चूड़ियां और प्रेस वायर के दो टूटे टुकड़े बरामद किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक ने मौत का कारण सिर में लगी चोट और उसकी जटिलताओं को बताया था। विसरा रासायनिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था।
राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि अमित के कथित इकबालिया बयान के अनुसार काजल का सिर झोपड़ी की छत से कई बार टकराया गया और प्रेस वायर से उसका गला भी दबाया गया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। अमित 27 अगस्त 2022 से जेल में है और लगभग चार वर्ष की हिरासत काट चुका है।
इसके बावजूद मुकदमा अभी समाप्त नहीं हुआ है। अदालत ने विशेष रूप से इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि कुल 14 अभियोजन गवाहों में अब तक केवल पांच-छह की गवाही हुई है।
जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि जब मुकदमे की गति अपेक्षित नहीं है, तब किसी आरोपित को अनिश्चित अवधि तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने अमित को जमानत दे दी और संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत व मुचलके भरने पर रिहा करने का आदेश दिया।
