चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। करीब पांच दशक से हरियाणा और पंजाब के बीच सियासत की वजह बनी सतलुज-यमुुुुना लिंक (SYL) नहर के निर्माण का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर है। पंजाब में विधानसभा चुनाव हो चुके और हरियाणा में अक्टूबर में होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पंजाब ने पहली बार इस मसले के स्थायी समाधान के लिए लचीला रुख अपनाया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ मुलाकात करने से एक दिन पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अधिकारियों की कमेटी गठित करने के संकेत दे दिए थे, जिसका मतलब साफ है कि अब पंजाब भी चाहता है कि SYL नहर निर्माण के मसले का समाधान होना चाहिए। यह अलग बात है कि पंजाब समझौते के मुताबिक हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी देने को राजी होता है या पंजाब में कम पानी होने की दुहाई देकर हरियाणा को कम पानी हासिल करने के लिए तैयार कर लेता है। यह दोनों राज्यों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर निर्भर करेगा।

हरियाणा हर हाल में चाहता है कि विधानसभा चुनाव से पहले सियासत की यह नहर बनकर तैयार हो जाए, ताकि इसमें वोटों का पानी बह सके। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा और पंजाब राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे एक बार मिल बैठकर SYL नहर निर्माण पर बातचीत करें। यदि बातचीत नहीं होती तो सुप्रीम कोर्ट तीन सितंबर को खुद अपने पूर्व के हरियाणा के हक में दिए फैसले को लागू करने का फरमान सुना सकता है।

यह संयोग ही है कि शुक्रवार को हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के बीच पहले से तय थी। मुद्दा उत्तरी भारत के राज्यों में बढ़ते नशे के नेटवर्क को तोड़ने का था। हरियाणा दो बार उत्तरी राज्यों की गोलमेज कांफ्रेंस की मेजबानी कर चुका है। अब 25 जुलाई को फिर से बैठक होगी, जिसकी मेजबानी करने की इच्छा पंजाब ने जाहिर की है। दोनों राज्यों की ओर से दलील दी जा रही है कि शुक्रवार की मीटिंग नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए रणनीति बनाने से जुड़ी थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि नशा तो बहाना है, मुख्य मुद्दा SYL नहर निर्माण का ही रहा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार दोनों राज्यों के सीएम के बीच करीब 35 मिनट तक मीटिंग हुई। हरियाणा और पंजाब राज्यों के मुख्यमंत्री कार्यालय एक ही बिल्डिंग में हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद पहल करते हुए चलकर हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे। मनोहर लाल ने कैप्टन को उनकी वरिष्ठता के हिसाब से पूरा सम्मान दिया। श्रीमद्भागवत गीता का संदेश देते भगवान श्रीकृष्ण का स्मृति चिन्ह भी कैप्टन को भेंट किया गया। फिर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच जो बातचीत हुई, वह कहीं न कहीं नशे के साथ-साथ SYL नहर निर्माण के मसले पर भी घूमती रही है।

पंजाब अपने राज्य में भरपूर पानी नहीं होने की जिद पर अड़ा

सूत्रों का कहना है कि पंजाब अपने राज्य में भरपूर पानी नहीं होने की जिद पर अड़ा हुआ है, जबकि हरियाणा का कहना है कि उसके पास पहले से ही 40 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) पानी की कमी है। ऐसे में अगर पंजाब सहयोग नहीं करेगा तो छोटा भाई हरियाणा कैसे सफर कर पाएगा। सूत्रों के मुताबिक पंजाब ने साफ कह दिया कि उसके पास हरियाणा को देने के लिए उतना पानी नहीं है, जितना समझौते के तहत देना बनता है। इस पर हरियाणा ने कहा कि आप तैयार होइए, बाकी मसलों पर हम ऊपर-नीचे कर लेंगे।

हरियाणा चाह रहा नहर तो बने, पानी की बंटवारा बाद में देख लेंगे

हरियाणा भी चाहता है कि किसी तरह पंजाब SYL नहर के निर्माण का काम पूरा करने को राजी हो जाए। पानी के बंटवारे पर तो बातचीत बाद में भी हो सकती है। हरियाणा ने पंजाब की तरह जल्द ही अपने राज्यों के उन अफसरों के नाम सार्वजनिक करने की बात कही है, जो केंद्र, पंजाब व हरियाणा के अधिकारियों की कमेटी में शामिल किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि केंद्र के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, पंजाब व हरियाणा के सीएम के बीच जल्द ही बैठक होगी, जिसमें तमाम मसलों पर बातचीत की जाएगी।

कैप्टन से मुलाकात के बाद मनोहर ने बुलाई कैबिनेट की बैठक

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच हुई बातचीत के तुरंत बाद हरियाणा सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुला ली है। यह बैठक 16 जुलाई को चंडीगढ़ में होगी। इस बैठक का एजेंडा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि SYL के मसले पर भी सरकार सहयोगियों के साथ चर्चा कर सकती है। इससे पहले बुधवार को राज्य मंत्री समूह की बैठक में हरियाणा ने पंजाब के साथ खुद बातचीत करने में आनाकानी करते हुए केंद्र से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करने का निर्णय लिया था, मगर अब गेम पलटा हुआ नजर आ रहा है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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