विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पंजाब-हरियाणा HC ने सड़क हादसे में मारे गए कारोबारी के परिवार का मुआवजा बढ़ाया, 27 लाख से 1.14 करोड़ रुपये किया

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:57 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृतक कारोबारी सुरेंद्र के परिवार को बड़ी राहत दी है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने मुआवजा 27.93 लाख से बढ़ाकर 1.14 करोड़ किया।

  2. मृतक पर लगाई 75% सहायक लापरवाही की शर्त हटाई।

  3. ब्याज दर 7.5% से बढ़ाकर 9% सालाना की गई।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले कारोबारी सुरेंद्र के परिवार को राहत देते हुए मुआवजा 27.93 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.14 करोड़ रुपये कर दिया है।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, हिसार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सुरेंद्र की 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही मानी गई थी।

अदालत ने कहा कि हादसे के बाद वाहनों की स्थिति के आधार पर मृतक को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मुआवजे पर ब्याज की दर भी 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत सालाना कर दी गई है।

मामला 24 फरवरी 2014 का है। सुरेंद्र अपने भाई बिरेंद्र के साथ मारुति स्विफ्ट डिजायर कार से गुरुग्राम से हिसार जा रहे थे। सुबह करीब आठ बजे नारनौंद थाना क्षेत्र में पिपला पुल के पास सामने से आ रहे टाटा कैंटर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसे में सुरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। वह सनराइज रोड कैरियर के मालिक थे और खेती बाड़ी भी करते थे।

1.11 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा तय किया

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने कुल 1.11 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा तय किया था, लेकिन सुरेंद्र की 75 प्रतिशत लापरवाही मानकर परिवार को केवल 27,93,936 रुपये देने का आदेश दिया। परिजनों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी बिरेंद्र ने गवाही में बताया था कि कार अपनी सही दिशा में चल रही थी और हादसा कैंटर चालक की लापरवाही से हुआ। जांच अधिकारी ने भी माना कि जांच में ऐसा कोई गवाह सामने नहीं आया, जिसने सुरेंद्र को हादसे के लिए जिम्मेदार बताया हो।

अदालत के अनुसार, हादसे के बाद वाहनों की स्थिति से यह साबित नहीं होता कि टक्कर से पहले कार गलत दिशा में चल रही थी। सहायक लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी इसका दावा करने वाले पक्ष की थी।

निष्कर्ष हटाकर मुआवजे की दोबारा गणना की

पीठ ने लापरवाही से जुड़ा निष्कर्ष हटाकर मुआवजे की दोबारा गणना की। परिवार को आश्रितता के नुकसान के लिए 1,11,05,744 रुपये,

पांच दावेदारों को पारिवारिक सहयोग की क्षति के लिए कुल 2.40 लाख रुपये, अंतिम संस्कार के लिए 18 हजार रुपये, संपत्ति की क्षति के लिए 18 हजार रुपये और शव ले जाने के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया। कुल मुआवजा 1,14,01,744 रुपये तय हुआ, जो पहले दिए गए मुआवजे से 86,07,808 रुपये अधिक है।

हाईकोर्ट ने दावा याचिका दाखिल करने की तारीख (2018) से भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया। आदेश के तीन महीने के भीतर भुगतान नहीं होने पर इसके बाद 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। कैंटर चालक, मालिक और बीमा कंपनी संयुक्त रूप से मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार होंगे।