जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा की अवैध कॉलोनियों को नियमित करने में अभी लंबा समय लग सकता है। पिछले दो साल में 982 कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव सरकार के पास आए। इस दौरान अधिकारियों ने नेताऔं और प्रॉपर्टी डीलरों के दबाव में ऐसी कालोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव भी सरकार के पास भेज दिए, जो नियमों में फिट नहीं बैठतीं। नतीजा यह रहा कि सरकार ने 454 कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव खारिज कर दिए।

अवैध कॉलोनियों को नियमित करने में अभी लगेगा एक साल, अभी शुल्क लेकर मिलती रहेंगी सुविधाएं  

हरियाणा सरकार ने उन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का निर्णय लिया था, जिनमें 31 मार्च 2015 से पूर्व 50 फीसद प्लाटों का निर्माण हो चुका है। सरकार का मानना है कि इन कॉलोनियों में यदि बिजली, पानी और सीवर के कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे तो चोरी के जरिए लोग उन्हें इस्तेमाल करेंगे। इसलिए सरकार ने शुल्क लेकर तमाम सुविधाएं लेने का अहम निर्णय किया। लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिजली, पानी और सीवर के कनेक्शन के आधार पर कॉलोनियों को नियमित नहीं माना जा सकेगा।

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इस दौरान सरकार ने कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव मंगवाने शुरू कर दिए। शुल्क लेकर अवैध कॉलोनियों में सुविधाएं मुहैया कराने की अवधि 20 अप्रैल 2018 को खत्म हो रही है, लेकिन राज्य सरकार ने हरियाणा नगरपालिका अपूर्ण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) अधिनियम 2016 में संशोधन करते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराने की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। यानी अब एक साल तक और कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव भेजे जा सकेंगे।

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शहरी निकाय मंत्री कविता जैन यह प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसे विधानसभा में पारित किया जा चुका है। राज्य में पालिका सीमाओं के अंतर्गत सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य के 80 शहरों से अभी तक 982 प्रस्ताव सरकार के पास आए, जिनमें अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का आग्रह किया गया है। इनमें से 528 प्रस्ताव उचित मिले। मगर अभी इन कॉलोनियों को नियमित होने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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