चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा में कोरोना महामारी के दौरान फ्रंट लाइन पर काम करने वाले स्वास्थ्य विभाग के करीब दस हजार कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। इनमें सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारी, वार्ड सरवेंट, प्लंबर, माली, धोबी, लिफ्ट मैन, इलेक्ट्रीशियन और चपरासी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग में यह सभी कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने किया विरोध, स्वास्थ्य महानिदेशक के पत्र किए जारी

इससे पहले भी लॉकडाउन के दौरान टूरिज्म निगम से 360, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कुरुक्षेत्र से 64 सफाई कर्मचारी, नगर निगम सोनीपत में 170 सफाई कर्मचारी, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पंचकूला, रोहतक व फरीदाबाद कार्यालयों से 50 डाटा इंट्री ऑपरेटरों को नौकरी से निकाला जा चुका है। यूजीसी के समय सारणी के विपरीत इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी के 83 साहयक प्रोफेसरों को कार्यमुक्त कर घर भेज दिया गया है।

इससे पहले भी हटाए जा चुके सैकड़ों कर्मचारी, नई भर्ती के लिए नई टेंडर प्रक्रिया

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के अध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी के अनुसार महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ने ठेका कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और नई भर्ती के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इससे पहले भी 31 मार्च को सभी सिक्योरिटी गार्ड को नौकरी से हटाकर होमगार्ड को तैनात करने का फ़ैसला सरकार ने लिया था।

इस फैसले से सरकार को ठेका कर्मचारियों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा था। तब फैसला टाल दिया गया था। मजदूर संगठन सीआइटीयू (सीटू) के महासचिव जयभगवान ने सरकार के मौजूदा प्रयासों की आलोचना की है।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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