चंडीगढ़, [सुधीर तंवर]। हरियाणा के गांवों में अब शराब ठेके खुलेंगे या नहीं, यह फैसला संबंधित गांव की ग्राम सभा करेगी। गांव के दस फीसद मतदाता अगर विकास एवं पंचायत अधिकारी को शराब ठेका नहीं खोलने के लिए लिखित में प्रस्ताव पारित कर सौंपती है तो वहां ठेका नहीं खोला जाएगा। साथ ही जिला परिषदों और पंचायत समितियों को हर साल न्यूनतम छह अधिवेशन बुलाने होंगे। दो अधिवेशन के बीच दो महीने से ज्यादा अंतर नहीं रखा जा सकेगा।

जिला परिषदों और पंचायत समितियों को हर साल बुलाने होंगे छह अधिवेशन

हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित हो गया। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बिल सदन पटल पर रखा जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में शराब ठेके नहीं खुलने की मांग उठती आ रही थी। ग्राम सभाओं को ठेका खोलने या नहीं खोलने देने के लिए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 31 की उपधारा 1 व 2 में संशोधन किया गया है।

हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक पर विधानसभा ने सर्वसम्मति से लगाई मुहर

इसके मुताबिक आबकारी एवं कराधान आयुक्त के पास शराब ठेका नहीं खोलने देने की अर्जी लगाने के लिए 31 अक्टूबर को बंद हो चुकी समय सीमा को 15 जनवरी तक बढ़ाया गया है। संशोधित नियम के मुताबिक गांव में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पंचों के बहुमत की बजाय ग्राम सभा द्वारा पारित किया जाएगा। एक हजार से कम घरों वाले गांव की पंचायत यदि शराब ठेका खोलने के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर भेजती है तो उस गांव में ठेका नहीं खोला जाएगा।

शहर की कॉलोनियों में भी बंद हो शराब की बिक्री

फरीदाबाद एनआइटी से कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने गांवों की तर्ज पर शहर की कॉलोनियों में भी शराब ठेके बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थलों के पास शराब ठेके नहीं खोले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गांवों में जब शराब की बिक्री पर फैसला ग्रामीणों के हाथ में दिया गया है तो शहरों में क्यों नहीं।

बंसी सरकार की तरह भारी न पड़ जाए शराबबंदी

महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने नई व्यवस्था पर आशंका जताते हुए कहा कि सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसी लाल द्वारा की गई शराबबंदी के बुरे परिणाम दोबारा न झेलने पड़ें। तब शराब बंदी के बावजूद शराब की अवैध सप्लाई कई गुणा बढ़ गई थी जिससे अपराध का ग्राफ काफी ऊंचा चला गया। निर्दलीय विधायक की आशंका को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तब और अब की स्थिति में काफी अंतर है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर कुछ गड़बड़ हुई तो फिर से नियम पलट देंगे। हम कहां कहीं चले गए हैं।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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