हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं! 2100 कैमरों से होगी निगरानी; अब तक 21 गिरफ्तार
हरियाणा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है, जिसमें 2100 ANPR कैमरों की खरीद और पुराने वाहनों व औद्योगिक इकाइयों पर शिकंजा कसना शामिल है।
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प्रदूषण फैलाने वालों पर डिजिटल शिकंजा, 2100 कैमरों से निगरानी।
HighLights
2100 ANPR कैमरों से प्रदूषण फैलाने वालों पर निगरानी
पुराने वाहन जब्त, औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण जारी
पराली जलाने पर 52 FIR, 21 लोग गिरफ्तार
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सर्दियों में स्मॉग की मार से दिल्ली-एनसीआर को बचाने के लिए हरियाणा प्रदूषण फैलाने वालों की निगरानी का दायरा बढ़ा रहा है। सड़कों पर दौड़ते पुराने वाहन हों या नियमों को ताक पर रखकर चल रही औद्योगिक इकाइयां, इन पर शिकंजा कसने के लिए तकनीक और प्रवर्तन दोनों का सहारा लिया जा रहा है।
प्रदेश में 600 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरों की खरीद को 14.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जबकि 1,500 अन्य कैमरों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया गया है।
पराली जलाने के मामले में 21 लोग गिरफ्तार
वहीं, एनसीआर के जिलों में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना वाहनों को पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। पराली जलाने के मामलों में 52 एफआईआर दर्ज हुईं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा और हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में वाहनों के उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा रखा गया।
इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर के मध्य तक हरियाणा यातायात पुलिस ने निर्धारित आयु-सीमा पूरी कर चुके 19,067 वाहन जब्त किए हैं। इनमें से 785 वाहनों को स्क्रैपिंग के लिए भेजा गया। पुराने व्यावसायिक ट्रकों और बसों को बीएस-6, इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों से बदलने की योजना के तहत 18,501 लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है। एनसीआर जिलों में डीजल से चलने वाले 596 आटो रिक्शा भी चरणबद्ध तरीके से हटाए गए हैं।
सड़कों की धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर भी नजर
बैठक में बताया गया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, मानेसर, करनाल, पानीपत और रोहतक में 748.89 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास किया गया है। इन सात शहरों में निर्माण एवं विध्वंस मलबे के सभी 44 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। धूल नियंत्रण के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें भी तैनात की गई हैं।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जनवरी से सितंबर के बीच निर्धारित क्षेत्रों में 4,129 और गैर-अनुरूप क्षेत्रों में 462 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। बैठक में पराली प्रबंधन पर चर्चा हुई। फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण का लक्ष्य 9,000 था, जबकि 13,200 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। झज्जर के बादली क्षेत्र में पराली को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले माडल ईंट-भट्ठे की सीएक्यूएम अध्यक्ष ने सराहना की।
