नई दिल्ली [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा में कृषि अध्यादेशों पर चंडीगढ़ से नई दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में किसान प्रतिनिधियों से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की बैठक शुरू हो गई है। कृषि मंत्री जेपी दलाल भी बैठक में मौजूद हैं। इसमें भाकियू नेेेता गुरनाम सिंह चढूनी नहीं पहुंचे। विशेष कमेटी के सदस्य भिवानी के सांसद धर्मबीर सिंह ने आगे आकर खुद भाकियू को न्योता भेजा था। वह सांसद केे आवास पर पहुंचे हैं। चढूनी ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलने की हरियाणा भाजपा की पहल को सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि जब तक के तीनों कृषि विधेयक वापस नहीं लिए जाते तब तक वे कृषि मंत्री से नहीं मिलेंगे।

सोमवार को संसद में पेश हो चुके तीन किसी विधेयकों को वापस लिए बिना किसी वार्ता के लिए भारतीय किसान यूनियन ने साफ़ इन्कार कर दिया है। हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के बुलावे पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाक़ात करने दिल्ली पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि जब तक तीन कृषि विधेयक वापस नहीं हो जाते तब तक वे वार्ता में शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने अपने साथ 19 किसान संगठनों का समर्थन का दावा करते हुए कहा कि भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह ने उनसे साफ़ कह दिया है कि संसद में पेश तीनों विधेयक वापस नहीं होंगे। इनमें कुछ संशोधनों के प्रस्ताव ही केंद्रीय कृषि मंत्री को दिए जा सकते हैं। चढूनी ने कहा कि हरियाणा भाजपा अध्यक्ष कृषि विधेयकों में बिना संशोधन ही किसानों के आंदोलन को ख़त्म करना चाहते हैं। इस तरह तो किसानों के बीच भारतीय किसान यूनियन भी बदनाम हो जाएगी।

उधर, हरियाणा भवन में चढूनी के बिना ही धनखड़ ने कुछ किसान संगठनों के साथ तीन कृषि विधेयकों में संशोधन मसौदे को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उनके साथ हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल और सांसद धर्मबीर सिंह, नायब सैनी, बृजेंद्र सिंह भी हैं। इस बैठक के बाद धनखड़ कुछ किसान संगठनों के साथ कृषि विधेयकों में संशोधन का मसौदा लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलेंगे।

उधर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के साथ मुलाक़ात कर तीन कृषि विधेयकों और किसानों की मांग को लेकर केंद्रीय नेताओं से मिलने की रणनीति भी तैयार कर ली है । उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला की रणनीति हरियाणा भाजपा से बिलकुल अलग है।

बता दें, किसान बचाओ-मंडी बचाओ रैली रोकने को लेकर लाठीचार्ज के बाद सरकार से नाराज चल रही भारतीय किसान यूनियन कुछ नरम पड़ी थी। भाकियू केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बातचीत के लिए तैयार हो गए थे। विशेष कमेटी सदस्य भिवानी के सांसद धर्मबीर सिंह ने आगे आकर खुद भाकियू को न्योता भेजा था। प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी मंगलवार सुबह ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

न्योते में यह कहा 

सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा किसानों का प्रदेश है। यहां की ज्यादातर आबादी खेतीबाड़ी पर निर्भर है। हाल ही में भारत सरकार कृषि से संबंधित तीन अध्यादेश लेकर आई है। इनको लेकर किसानों में कुछ भ्रांतियां हैं। इन भ्रांतियों की वजह से विगत दिनों किसानों ने प्रदर्शन किया था। ये अध्यादेश संभवत 16 सितंबर को लोकसभा में बिल के तौर पर पेश किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी 15 सितंबर तक केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ बातचीत के लिए आ सकते हैं। वे किसानों की मांगों को लिखित में भी दे सकते हैं। हालांकि चढ़ूनी ने आज इससे इन्कार कर दिया है।

किसानों का हक नहीं मरने देंगे

भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि वह किसानों के लिए यहां तक पहुंचे हैं। तीनों अध्यादेश किसान, आढ़ती और मंडी को बर्बाद करने वाले हैं। उन्होंने 10 सितंबर को कुरुक्षेत्र की पिपली नई अनाज मंडी में दूसरे संगठनों के साथ रैली बुलाई थी। प्रशासन ने मनमर्जी करते हुए दो दिन पहले परमिशन रोक ली और किसानों को रैली में जाने से रोक दिया। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें दर्जनों किसान घायल हो गए। वे किसानों की मांगों को लेकर आज भी अडिग हैं। 

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