जेएनएन,चंडीगढ़। पराली जलाने से वायुमंडल में घुल रहे जहर से निपटने को एक पखवाड़े से जूझ रहे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष दीपावली पर चुनौतियां और बढ़ गई हैं। आतिशबाजी का दौर शुरू होने से हवा में जहरीली गैसों की मात्रा अचानक बढ़ गई है। आशंका है कि दीपावली तक यह मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है। ऐसे में सरकारी तंत्र सक्रिय हो गया है ताकि लोगों को ग्रीन दिवाली मनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।

रविवार को दीपावली है। उससे पहले ही आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। खासकर एनसीआर क्षेत्र में कई स्थानों पर पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) का स्तर 266 तक पहुंच गया है। खास बात ये कि आतिशबाजी के दौरान इतना वायु प्रदूषण नहीं होता जितना आतिशबाजी के बाद। हर दीपावली पर प्रदूषण चार गुना बढ़ जाता है। आतिशबाजी के बाद हवा में धूल के महीन कण उपस्थित रहते हैं जिससे बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ता है।

इसी के मद्देनजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लोगों से धुएं वाले पटाखे नहीं फोडऩे और आतिशबाजी को कम करने की अपील की जा रही है। बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. एसके रोहिल्ला के मुताबिक खासकर बच्चों और युवाओं को आतिशबाजी से परहेज कर ग्रीन दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा धीमी आवाज वाले पटाखे छोडऩे की सलाह दी जा रही है। पटाखों के कारण वातावरण में ध्वनि प्रदूषण का स्तर 15 डेसीबल बढ़ जाता है। इसके कारण श्रवण क्षमता प्रभावित होने, कान के पर्दे फटने, दिल के दौरे पडऩे, सिर दर्द, अनिद्रा और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हवा में हानिकारक गैसों तथा निलंबित कणों का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण फेफड़े, गले तथा नाक संबंधी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
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क्या है पीएम 2.5
पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) वातावरण में मौजूद धूल के कण हैं जो 2.5 माइक्रोग्राम से भी पतले होते हैं। ये फेफड़ों के कैंसर के सबसे बड़े कारक हैं।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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